
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। यह पूरी धांधली पिछले तीन वर्षों (वर्ष 2023 से 2026 तक) के दौरान जेम पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदी में सामने आई है।
विभाग द्वारा कराए गए विशेष ऑडिट और डेटा विश्लेषण के अनुसार, इन तीन वर्षों में कुल 1,134 करोड़ रुपये की सरकारी खरीदी की गई थी, जिसमें 250 करोड़ रुपये का गोलमाल किया गया। यदि यह खरीदी औसत और सही बाजार दरों पर की जाती, तो जनता की गाढ़ी कमाई के कम से कम 250 करोड़ रुपये बचाए जा सकते थे।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय दुबे ने खुद इस पूरे भ्रष्टाचार की पोल खोली है। विभागीय समीक्षा बैठक में एसीएस दुबे और एमपीएसईडीसी के एडिशनल एमडी अंशुमान राज के प्रस्तुतीकरण में सामने आए इन हैरान करने वाले तथ्यों ने सरकार के पारदर्शी जेम पोर्टल की भी पोल खोली है। बता दें कि अंशुमान राज ने एसडीएम रहते ऐसी गड़बड़ी पकड़ी थी, जब प्रदेश भर का डेटा जांचा गया तो यह बड़ी गड़बड़ी सामने आई।
इस पूरी गड़बड़ी में एक निकाय ने जो कचरा वाहन दो लाख में खरीदा, दूसरे निकाय ने कुछ अतिरिक्त सामान के नाम पर वही वाहन छह लाख में खरीद डाला। कई छोटे निकायों ने जरूरत न होने पर भी डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपये के कचरा वाहन खरीद लिए।
जो एलईडी लाइट 306 रुपये में मिलनी चाहिए थी, उसे अलग-अलग निकायों ने 11,800 रुपये तक की अत्यधिक ऊंची दरों पर खरीदा। 200 एलईडी लाइट्स की खरीदी का रेट 60 लाख रुपये तक पहुंचा दिया गया। पांच रुपये प्रति लीटर मिलने वाले केमिकल को कुछ जगहों पर भारी भ्रष्टाचार कर 33,500 रुपये प्रति लीटर तक की दर पर कागजों में खरीदा दर्शाया गया।
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मामले में सरकार ने 138 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की है। वित्तीय अनियमितताओं एवं पदीय लापरवाही पर सात अधिकारी सेवा से पदच्युत, 76 की वेतनवृद्धि रोकी गई तथा 80 ठेकेदार/फर्में ब्लैकलिस्ट की गई हैं।
इधर, इस पूरे मामले को लेकर विभाग की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का कहना है कि इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।