
मुकेश विश्वकर्मा, नईदुनिया, भोपाल। शहर की छोटी-बड़ी गलियों में मरीजों की सेहत से खिलवाड़ का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के डॉक्टर बिना किसी अधिकार के एलोपैथी की दवाएं लिख रहे हैं और मरीजों को इंजेक्शन, ग्लूकोज की बोतल तक लगा रहे हैं। कानूनन आयुष डॉक्टरों को एलोपैथी लिखने की इजाजत नहीं है, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर ये क्लिनिक चल रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग को सब पता होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। विभाग की अनदेखी से इन झोलाछाप डॉक्टरों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता की जान जोखिम में है। नवदुनिया की टीम ने शहर के तीन इलाकों में पड़ताल की तो हकीकत सामने आई।
डॉ. साजिद अहमद, लाइफ लाइन क्लिनिक
सुंदर नगर में डॉ. साजिद अहमद की क्लिनिक है। डिग्री के हिसाब से वे बीएचएमएस यानी होम्योपैथी के डॉक्टर हैं। शाम होते ही यहां मौसमी बुखार, खांसी-जुकाम के मरीजों की भीड़ लग जाती है। क्लिनिक में तीन बेड भी लगे हैं। यहां मरीजों को सलाइन की बोतल चढ़ाई जाती है और मामूली सर्जरी भी की जाती है। ये सभी काम सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टर ही कर सकते हैं।
डॉ. अनीश अहमद, विजय नगर
सेमरा कलां के विजय नगर में डॉ. अनीश अहमद रिलीफ हेल्थ क्लिनिक चलाते हैं। उनके पास यूनानी की डिग्री है। क्लिनिक में बीयू की कुछ और डिग्री भी टंगी हैं। लेकिन मरीजों को दी जा रही हैं एलोपैथी की दवाएं। यहां इलाज कराने बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक आते हैं। बिना जांच-पड़ताल के महंगी अंग्रेजी दवाएं दी जा रही हैं।
डॉ. मुबीन खान और डॉ. सीमा खान, आदर्श क्लिनिक
अशोका गार्डन की सुभाष कालोनी में आदर्श क्लिनिक चलती है। यहां डॉ. मुबीन खान और डॉ. सीमा खान बीयूएमएस डिग्री के साथ प्रैक्टिस कर रहे हैं। डॉ. सीमा खान खुद को स्त्री रोग विशेषज्ञ बताकर इलाज करती हैं, लेकिन क्लिनिक में इसका कोई विशेष प्रमाण पत्र नहीं मिला। दोनों डॉक्टर मरीजों को सीधे एलोपैथी दवाएं दे रहे हैं।
आयुष चिकित्सकों को केवल अपनी पद्धति की दवाएं लिखने का अधिकार है। एलोपैथी दवा लिखना, इंजेक्शन लगाना और सर्जरी करना पूरी तरह अवैध है। इसके बावजूद शहर में दर्जनों क्लिनिक इस नियम को तोड़कर चल रहे हैं।
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यह नियमों के खिलाफ है। ऐसे डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। हम कार्रवाई के लिए चार लोगों की एक टीम बना रहे हैं। यह टीम शहर की सभी संदिग्ध क्लिनिकों का निरीक्षण करेगी और जहां भी अनियमितता मिलेगी वहां तुरंत कार्रवाई की जाएगी। बिना जानकारी के एंटीबायोटिक और स्टेरायड देने से मरीजों में दवा का रिएक्शन, किडनी-लीवर खराब होने और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। - डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ भोपाल