
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश को माओवाद मुक्त करने की दिशा में रविवार को 10 माओवादियों का आत्मसमर्पण एक बड़ी उपलब्धि है। ये सभी कान्हा भोरमदेव दलम (केबी) के सदस्य थे, जो कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास सक्रिय था। इनके समर्पण से मध्य प्रदेश का मंडला जिला माओवादी समस्या से लगभग मुक्त हो गया है। केंद्र सरकार ने इसी वर्ष मंडला और डिंडौरी को माओवादी समस्या से कम प्रभावित जिलों की सूची में शामिल किया था।
केबी डिवीजन के समाप्त होने के बाद अब पुलिस का पूरा ध्यान मलाजखंड दलम को घेरने पर है, जिससे पुलिस के लिए घेराबंदी भी आसान हो गई है। मलाजखंड दलम की माओवादी सुनीता पहले ही आत्मसमर्पण कर चुकी है। इस दलम में मुख्य नाम रामदेर का है, जिसकी पुलिस अब घेराबंदी करेगी। दो माह पहले एक ग्रामीण की हत्या में भी रामदेर का नाम आया था। सूत्रों के अनुसार, रामदेर भी अपने साथियों के साथ जल्द ही आत्मसमर्पण कर सकता है।
इससे पहले समर्पण करने वाली मलाजखंड दलम एरिया कमेटी की सदस्य सुनीता ने भी पुलिस पूछताछ में बताया था कि महाराष्ट्र में भूपति के साथ 60 माओवादियों के आत्मसमर्पण की जानकारी रामदेर ने ही दलम के सदस्यों की दी थी और बताया था कि यहां मौजूद सभी सदस्य आत्मसमर्पण का विचार कर रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एक माह पहले तक तीन दलम सक्रिय थे, जिसमे केबी दलम के अतिरिक्त दर्रेकशा और मलाजखंड दलम थे। दर्रेकशा दलम के अधिकतर माओवादियों ने हाल ही में दूसरे राज्यों में आत्मसमर्पण कर दिया है, जिनकी संख्या लगभग 10 बताई जा रही है। इनमें मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) जोन का प्रवक्ता अनंत उर्फ विकास नगपुरे भी शामिल है। इस तरह अब सिर्फ मलाजखंड दलम ही बचा है, जिसमें शामिल माओवादी मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में ही अब सक्रिय हैं, जिनकी संख्या 20 के आसपास हो सकती है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को माओवादी समस्या से 31 मार्च तक मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में पुलिस ने दबाव की रणनीति बनाई। इसके तहत ग्रामीणों को सुरक्षा का भरोसा दिया गया, पुलिस बल बढ़ाया गया, और विशेष सहयोगी दस्ते की भर्ती की गई। पुलिस पर भरोसा बढ़ने के कारण ग्रामीणों ने माओवादियों का सहयोग करने से इन्कार कर दिया। उन्हें राशन देना, सूचना देना या अन्य तरह की मदद बंद कर दी गई। इस कारण माओवादी असहाय हो गए और आत्मसमर्पण करने पर मजबूर हो रहे हैं।