
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट अब शहर की पुरानी बसाहटों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। कहीं किसानों की कृषि भूमि को ग्रीन बेल्ट और फॉरेस्ट में शामिल करने का विरोध हो रहा है तो कहीं चौड़ी सड़कों के प्रस्ताव पर आपत्तियां उठ रही हैं। अब खानूगांव (ग्राम कोहेफिजा) के रहवासियों ने भी मास्टर प्लान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
उनका आरोप है कि करीब 215 साल पुरानी आबादी के अधिकतर खसरों को लेकफ्रंट और ग्रीन बेल्ट में शामिल करने का प्रस्ताव कर दिया गया है, जबकि यहां पहले से आवासीय बसाहट है। रहवासियों ने सवाल उठाया है कि जब बड़े तालाब के FTL से 100 मीटर दूर तक बाउंड्रीवॉल बनाई जा चुकी है, तब इसके आगे बसे खानूगांव के आवासीय क्षेत्र का भू-उपयोग बदलने की जरूरत क्या है? उन्होंने कैचमेंट क्षेत्र के संरक्षण के लिए 50 मीटर का दायरा छोड़कर बाकी खसरों को आवासीय घोषित करने की मांग की है।
खानूगांव के रहवासी सैयद फहीमुद्दीन की ओर से प्रस्तुत आपत्ति में कहा गया है कि यहां भोपाल रियासत के समय से आबादी बसी हुई है। समय के साथ यह बसाहट बढ़ती गई। अभी यहां मकान, धर्मस्थल और दूसरी आवासीय सुविधाएं मौजूद हैं। शासन की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से पंपिंग स्टेशन भी बनाया गया है, जिसका उपयोग स्थानीय लोग करते हैं। ऐसे में वर्षों से बसे क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट में शामिल करने का प्रस्ताव रहवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
रहवासियों ने प्रकरण क्रमांक 120/78, साजिदा सुल्तान विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन का हवाला देते हुए कहा है कि संबंधित क्षेत्र को आवासीय रूप में दर्शाया गया था। उनका दावा है कि संबंधित संपत्ति को राजस्व से लेकर भारत सरकार के रिकॉर्ड तक निष्क्रांत (कस्टोडियन) संपत्ति के रूप में दर्ज नहीं किया गया। रहवासियों ने पुराने कोर्ट केस और साल 2014 के गूगल अर्थ मैप की कॉपी भी आपत्ति के साथ लगाई हैं। मांग की गई है कि खानूगांव के आवासीय भू-उपयोग को जैसा है वैसा ही रखा जाए।
मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट पर अब तक पांच हजार से अधिक आपत्तियां मिल चुकी हैं। बड़ा तालाब के कैचमेंट क्षेत्र, ग्रीन बेल्ट, अवैध निर्माण और चौड़ी सड़कों के प्रस्ताव विरोध के बड़े मुद्दे हैं। भारतीय किसान संघ ने कृषि भूमि का भू-उपयोग नहीं बदलने और BIZ-1 व BIZ-2 जोन हटाने की मांग उठाई है। मिसरोद के रहवासी प्रस्तावित 45 मीटर चौड़ी सड़क का विरोध कर रहे हैं। आपत्तियों की छंटनी में करीब 15 दिन लगने का अनुमान है। इसके बाद सुनवाई का शेड्यूल जारी होगा।
मास्टर प्लान 2047 ड्राफ्ट पर अब तक करीब पांच हजार आपत्तियां प्राप्त हो चुकी हैं, आपत्तियां दर्ज करवाने का आज अंतिम दिन है।सभी आपत्तियों को सुनवाई के बाद शासन के समक्ष रखा जाएगा।
-नीरज आनंद लिखार, ज्वाइंट डायरेक्ट, टीएंडसीपी