‘नेफ्रोटिक सिंड्रोम’ से पीड़ित बेटी के लिए पूरा जीवन लगा दिया! अब वह स्वस्थ है
भोपाल, नवदुनिया प्रतिनिधि! बच्चों को गरमागरम, ताजा खाना देना, उन्हें जो खाने का मन हो, उन चीजों को बनाना... ऐसा तो हर मां करती है, लेकिन शाहपुरा के स्टार एवेन्यू में रहने वाली संगीता रस्तोगी अपनी बेटी अंशिता के लिए इससे भी दो कदम आगे गईं। उन्होंने बाजार में मिलने वाली हर चीज को घर में बनाना सीखा, क्योंकि डाक्टर ने बेटी को बाहर की चीजें खाने से मना किया था। उन्होंने घर पर यूरिन टेस्ट करना सीखा, ताकि हर तीन-चार दिन में घर पर ही जांच हो सके और स्थिति बिगड़ने का पता समय रहते चल सके। उन्होंने खुद योग सीखा, ताकि बेटी को सिखा सकें।
संगीता बताती हैं कि बेटी अंशिता का जन्म 1991 में हुआ। जब वो दो साल की हुई तो एक दिन अचानक उसकी आंखें सूजी दिखीं। मुझे और मेरे पति सुनील को लगा कि कीड़े ने काटा होगा, लेकिन बाद में डाक्टर ने बताया कि बेटी को ‘नेफ्रोटिक सिंड्रोम’ है। इस बीमारी में किडनी ठीक से काम नहीं करती। शरीर से सारा प्रोटीन यूरिन के जरिए निकल जाता है और शरीर में पानी भरने लगता है। इस बीमारी की वजह से बच्चों की ऊंचाई कम रह जाती है, हाथ-पैर टेढ़े हो जाते हैं।
संगीता बताती हैं कि ये सब सुन हम घबरा गये। हमने तुरंत इलाज शुरू करवाया। कुछ समय सब ठीक रहा, लेकिन जब अंशिता पांच साल की हुई तो स्थिति बिगड़ गई। शरीर में इतना पानी भर गया कि वह दूसरे अंगों को प्रभावित करने लगा। भोपाल के डाक्टर ने कह दिया कि आपके पास आठ घंटे का समय है, इसे दिल्ली के अस्पताल ले जाएं। तब दिल्ली में इलाज से अंशिका सामान्य हुई। वहां के डाक्टर ने कहा कि अंशिका को बाहर की चीजें खाने नहीं देना है। तब मैंने दोस्तों, रिश्तेदारों, दुकानदारों से पूछ-पूछ हर चीज बनाना सीखा। आज यूट्यूब से ये सब सीखना आसान है, लेकिन 25-26 साल पहले स्थिति अलग थी।
आज मैं चाइनीज व इटालियन खाना, पिज्जा, बर्गर, पास्ता, ब्रेड, पाव, केक, घी, पनीर, आइसक्रीम, फ्रूट जैम, टमेटो सास, पानी पुरी, समोसे, कचोरी हर चीज खुद बनाती हूं। अंशिता बताती हैं कि मम्मी ने बचपन से ही मेरे खाने-पीने की हर चीज का ख्याल रखा। सुबह-शाम अंकुरित चीजें, सलाद खिलाया। बिना नमक का खाना बनाया। मेरे चार मामा हैं।उनमें से तीन मामा की शादी में मम्मी मेरी वजह से मेरठ नहीं गई, क्योंकि मुझे लोगों से भी संक्रमण फैल सकता था।मम्मी दिन-रात मेरे पीछे लगी रहती थी कि ये खा लो, ये पी लो... योग का वक्त हो गया, टहलने का वक्त हो गया। आज मैं स्वस्थ हूं। ऊंचाई अच्छी है, हाथ-पैर सामान्य हैं। मैंने बीई की पढ़ाई पूरी की, कुछ साल बैंक में नौकरी की और अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हूं, बच्चों को पढ़ा रही हूं, इन सब का श्रेय मम्मी को जाता है।
नेफ्रोटिक सिंड्रोम क्या है
किडनी शरीर के दूषित पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करती है, लेकिन किडनी की छन्नी में बड़े छेद हो जाने के कारण शरीर के आवश्यक पोषक तत्व और प्रोटीन मूत्रमार्ग से जरिए शरीर से बाहर निकल जाता है। इससे खून में प्रोटीन की कमी हो जाती है। इसकी वजह से आंखों और पेट में सूजन हो जाती है, साथ ही कोलेस्ट्राल बढ़ जाता है। अगर उचित उपचार नहीं किया जाए तो ये बीमारी लंबे समय तक प्रभावित करती है।