
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रधानमंत्री आवास शहरी के अंतर्गत मध्य प्रदेश में आगामी पांच साल में दस लाख आवास बनाए जाने हैं। योजना में बिल्डरों को भी शामिल किया गया है। हितग्राहियों को सस्ती दर पर आवास मिल जाएंगे और बिल्डर का भी नुकसान ना हो, इसे ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश में किफायती आवास नीति तैयार की जा रही है। इसे लेकर बुधवार को नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय नगर प्रबंधन संस्थान में किफायती आवास की चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर मंथन किया।
इस दौरान नगरीय विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर को निर्देश दिए कि अगले 30 दिनों के भीतर नीति का अंतिम प्रारूप तैयार कर प्रस्तुत करे। किफायती आवास नीति पर सभी हितधारकों से उनके विचार जाने गए। स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल द्वारा किफायती आवास की चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें पर्यावरणीय में संतुलन, सामाजिक स्थिरता तथा शहरी स्थानीय निकायों की भूमिका पर विचार विमर्श किया गया।
नगरीय विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि विभाग के पास वर्तमान में लगभग 55 लाख प्रॉपर्टी आईडी का विशाल डेटा उपलब्ध है। इस डेटा का उपयोग कर एक सशक्त और साक्ष्य-आधारित हाउसिंग पालिसी तैयार की जाएगी। उन्होंने विभाग के अपर आयुक्त शिशिर गेमावत को निर्देश दिए कि नीति निर्माण में क्रेडाई जैसे संगठनों के माध्यम से निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। नई नीति में आइटी टूल्स का प्रभावी उपयोग किया जाएगा, जिससे योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता आए।
कार्यशाला में विभिन्न नगर निगमों के आयुक्त, स्मार्ट सिटी के सीईओ और विकास प्राधिकरणों के अध्यक्षों, भवन विकास निगम के प्रबंध संचालक सीबी चक्रवर्ती ने सुझाव दिए। डब्लूआरआइ इंडिया के सिद्धार्थ त्यागराजन ने आवासीय क्षेत्रों को संपूर्ण और सुविधाजनक बनाने, डा. साकेत सर्राफ (अहमदाबाद) ने आवासों में ऊर्जा दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा की आवश्यकता, सीआइआइ हैदराबाद की दिशा जैन ने आनलाइन माध्यम से जुड़कर ग्रीन रेटिंग प्रक्रिया और डा. अपर्णा वेदुला ने आवासों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए क्रॉस-सब्सिडी मॉडल पर बात रखी।
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प्रधानमंत्री आवास योजना के अनुसार किफायती आवास बनाने के लिए बिल्डर को भूमि निश्शुल्क दी जाएगी। एक फ्लैट की लागत दस लाख रुपये रखी गई है। इसके लिए भारत और प्रदेश सरकार मिलकर हितग्राही को ढाई लाख रुपये देंगे। दो लाख रुपये का कम ब्याज दर पर बैंकों से ऋण दिलाया जाएगा। शेष राशि की व्यवस्था क्रास-सब्सिडी माडल के माध्यम से होगी यानी बिल्डर फ्लेट, दुकान बाजार दर पर बेचकर जो लाभ कमाएंगे उसमें से लागत की राशि की पूर्ति होगी।