
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में अब शहरों में चलने वाली सिटी बसें उपनगरीय (आसपास के) इलाकों तक भी जा सकेंगी। सरकार ने इसके लिए कानून में बदलाव को मंजूरी दे दी है। मंत्रालय में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मध्य प्रदेश मोटरयान कराधान अधिनियम-1991 में संशोधन का निर्णय लिया गया। अभी तक पूर्व में इस श्रेणी के रूट पर मोटरयान कर ज्यादा होने से उप-नगरीय क्षेत्रों तक सिटी बसों का संचालन नहीं हो पा रहा था। इसका सीधा फायदा यात्रियों और बस संचालकों, दोनों को मिलेगा।
दरअसल, यह सारी कवायद मुख्यमंत्री मोहन यादव के उन निर्देशों के तहत की गई है, जिसमें उपनगरीय क्षेत्रों में बस सेवा आरंभ करने की बात कही थी। नई व्यवस्था के तहत सिटी बसों के रूट परिवहन विभाग तय करेगा और उन्हें अधिसूचित किया जाएगा।
सिटी बसें नगर निगम सीमा से बाहर, आसपास के कस्बों और कॉलोनियों तक चल सकेंगी। इससे रोजाना शहर आने-जाने वालों को सस्ता और सुविधाजनक सफर मिलेगा। इसके साथ ही इस श्रेणी की सिटी बसों में मोटरयान कर की दरें भी कम की गई है।
पहले सिटी बस पर 150 रुपये प्रति सीट प्रतिमाह मोटरयान कर लगता था। अब यह कर 150 रुपये प्रति सीट प्रति तिमाही होगा, यानी अब सिर्फ 50 रुपये प्रति सीट प्रतिमाह टैक्स देना होगा। टैक्स ज्यादा होने की वजह से अब तक बसें उपनगरीय इलाकों तक नहीं जा पा रही थीं। इस फैसले से यह दिक्कत खत्म होगी।
तय रूट पर चलने वाली बसों के अस्थायी परमिट के टैक्स में 20-25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। केवल आकस्मिक परिस्थितियों में संबंधित आरटीओ द्वारा लिखित आदेश जारी करते हुए ही एक निश्चित मार्ग पर चलने वाले वाहन यानी मंजिली गाड़ी के अस्थाई परमिट जारी किए जाएंगे। इससे अस्थायी परमिट लेकर नियमित बस चलाने के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।