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समान काम, अलग वेतन! MP के 1.83 लाख संविदा कर्मचारियों ने सरकार से मांगी बराबरी की सुविधाएं

मध्यप्रदेश में 1.83 लाख संविदा, स्थाई और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने समान कार्य के बदले समान वेतन व सेवा सुविधाओं की मांग उठाई है। कर्मचारी संगठन नी...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Mon, 27 Jul 2026 10:31:04 AM (IST)Updated Date: Mon, 27 Jul 2026 10:31:04 AM (IST)
समान काम, अलग वेतन! MP के 1.83 लाख संविदा कर्मचारियों ने सरकार से मांगी बराबरी की सुविधाएं
संविदा कर्मचारियों ने सरकार से मांगी बराबरी की सुविधाएं। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 1.83 लाख कर्मचारियों ने समान वेतन की मांग उठाई।
  2. संविदा कर्मचारियों को नियमित जैसी सुविधाएं नहीं मिल रहीं।
  3. कर्मचारी संगठनों ने चरणबद्ध नियमितीकरण नीति की मांग की।

डिजिटल डेस्क। मध्यप्रदेश में नियमित और संविदा कर्मचारियों के बीच वेतन एवं सेवा सुविधाओं का अंतर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि प्रदेश में करीब 1.83 लाख संविदा, स्थाई और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी नियमित कर्मचारियों के समान जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो समान वेतन मिल रहा है और न ही नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं। कर्मचारी नेताओं ने सरकार से समान कार्य के लिए समान वेतन और चरणबद्ध नियमितीकरण की नीति लागू करने की मांग की है।

समान काम, लेकिन सुविधाओं में बड़ा अंतर

कर्मचारी संगठनों के अनुसार नियमित कर्मचारियों को महंगाई भत्ता, वार्षिक वेतनवृद्धि, पदोन्नति, क्रमोन्नति और समकक्ष वेतनमान जैसी सुविधाएं मिलती हैं। वहीं संविदा कर्मचारियों का मासिक वेतन अधिकांश मामलों में 8 हजार से 25-30 हजार रुपये के बीच सीमित है। इसके अलावा उन्हें नौकरी की सुरक्षा और अन्य वित्तीय लाभ भी नियमित कर्मचारियों की तुलना में नहीं मिलते।


कर्मचारी नेताओं ने सरकार से की नीति बनाने की मांग

मध्यप्रदेश कर्मचारी कांग्रेस के अध्यक्ष रमेश राठौर का कहना है कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को समान वेतन और सेवा सुविधाएं मिलनी चाहिए। वहीं कर्मचारी नेता सुरेंद्र निगम ने सरकार से संविदा, स्थाई और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए चरणबद्ध नीति तैयार करने की मांग की है, ताकि सभी कर्मचारियों को समान अवसर और सुरक्षा मिल सके।

नियमित कर्मचारियों को मिलती हैं ये प्रमुख सुविधाएं

  • नियमित कर्मचारियों को वर्ष में दो बार महंगाई भत्ता, वार्षिक वेतनवृद्धि, क्रमोन्नति, मकान किराया भत्ता, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, विभिन्न प्रकार के अवकाश, महिला कर्मचारियों के लिए विशेष अवकाश तथा पात्रता के अनुसार पेंशन जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि संविदा नियुक्तियों का बढ़ता दायरा भविष्य में असंतोष बढ़ा सकता है। ऐसे में सेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नीति बनाना समय की आवश्यकता है।