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MP में साइबर ठगी का अजब नियम, 500 रुपये की रकम वापस लेने के लिए भी देना होगा 1000 रुपये का बॉन्ड

मध्य प्रदेश में साइबर ठगी की रकम वापस पाने के लिए पीड़ितों को 1000 रुपये का क्षतिपूर्ति बॉन्ड देना पड़ रहा है। साइबर पुलिस ने राशि घटाने का प्रस्ताव भ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Wed, 26 Aug 2026 12:24:40 PM (IST)Updated Date: Wed, 26 Aug 2026 12:24:40 PM (IST)
MP में साइबर ठगी का अजब नियम, 500 रुपये की रकम वापस लेने के लिए भी देना होगा 1000 रुपये का बॉन्ड
MP में साइबर ठगी का अजब नियम। (एआई जनरेटेड)

HighLights

  1. ठगी की रकम लौटाने के लिए 1000 रुपये बॉन्ड अनिवार्य।
  2. 500 रुपये रिफंड पर भी 1000 रुपये स्टाम्प खरीदना।
  3. राजस्थान ने बॉन्ड राशि घटाकर 200 रुपये कर दी।

डिजिटल डेस्क। मध्य प्रदेश में साइबर ठगी का शिकार हुए लोगों को अपनी ही लूटी हुई रकम वापस पाने में एक अजीबोगरीब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के बाद ठगों के बैंक खातों में होल्ड (फ्रीज) की गई राशि लौटाने की प्रक्रिया भले ही शुरू हो गई है, लेकिन इसके लिए मध्य प्रदेश में पीड़ितों को 1000 रुपये का क्षतिपूर्ति बॉन्ड देना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अगर किसी पीड़ित को महज 500 रुपये का रिफंड भी लेना है, तब भी उसे 1000 रुपये का स्टाम्प खरीदना ही होगा।

स्टाम्प कानून की बाध्यता बन रही बाधा

  • यह पूरी समस्या 'इंडियन स्टाम्प एक्ट-1899' के नियमों के कारण पैदा हुई है। इस एक्ट के तहत मध्य प्रदेश में क्षतिपूर्ति बॉन्ड के लिए 1000 रुपये की स्टाम्प ड्यूटी अनिवार्य है।
  • वर्तमान एसओपी (SOP) में यह स्पष्टीकरण नहीं है कि कितनी रकम की वापसी पर कितने मूल्य का स्टाम्प देना होगा। इसी कानूनी पेंच के कारण जिन लोगों की कम राशि ठगी गई है, उनके लिए रिफंड प्रक्रिया आर्थिक रूप से अव्यावहारिक साबित हो रही है।

राजस्थान और कश्मीर ने दी राहत, मप्र में भी प्रस्ताव लंबित

इस समस्या को देखते हुए राजस्थान सरकार ने अपने यहां क्षतिपूर्ति बॉन्ड की राशि को घटाकर 200 रुपये कर दिया है। इसी तरह जम्मू-कश्मीर और कुछ अन्य राज्यों ने भी इसमें कटौती कर पीड़ितों को राहत दी है। इस तर्ज पर मध्य प्रदेश की साइबर पुलिस ने भी राज्य के गृह विभाग को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें बॉन्ड की राशि को घटाकर 100 रुपये करने की सिफारिश की गई है। गृह विभाग इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगा।

आखिर क्यों भरवाया जाता है यह बॉन्ड?

अधिकारियों के अनुसार, क्षतिपूर्ति बॉन्ड भरवाने का मुख्य उद्देश्य कानूनी जटिलताओं से बचना है। अगर पीड़ित को पैसे वापस मिलने के बाद भविष्य में कोई दूसरा दावेदार अदालत पहुंच जाता है। कोर्ट किसी अन्य वैधानिक कारण से वह रकम वापस मांगता है, तो ऐसे में वह व्यक्ति जवाबदेह होगा, जिसे रिफंड मिला है।

क्या है रिफंड पाने की ऑनलाइन प्रक्रिया?

  • राज्य साइबर सेल के आईजी शिराज ए. के मुताबिक, ठगी गई होल्ड राशि वापस पाने के लिए एक निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया का पालन करना होता है:
  • सबसे पहले 'मनी रेस्टोरेशन सिटीजन पोर्टल' (https://mrm-ncrp.mha.gov.in) पर जाना होगा।
  • यहां अपनी शिकायत के एक्नॉलेजमेंट नंबर या ओटीपी के माध्यम से लॉग-इन करें।
  • लॉग-इन करते ही स्क्रीन पर दिखेगा कि किस बैंक खाते में आपकी कितनी राशि होल्ड की गई है।
  • इसके बाद आवश्यक दस्तावेज जैसे बैंक डिटेल्स, आईएफएससी (IFSC) कोड, पैन कार्ड, ठगी का विवरण, एफआईआर की कॉपी और कोर्ट का रिफंड ऑर्डर (यदि हो) दर्ज करें।
  • अंत में 'Raise Request For Refund' पर क्लिक करें। इससे एक यूनिक आईडी नंबर जनरेट होगा।
  • यह रिक्वेस्ट संबंधित जांच अधिकारी के पास जाएगी। अधिकारी द्वारा सत्यापन करने और पीड़ित से बॉन्ड लेने के बाद खाते में पैसे रिफंड कर दिए जाएंगे।

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