
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश के दूर दराज के क्षेत्रों और जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी अब जल्द ही दूर होने जा रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए अपनी भर्ती प्रक्रिया तेज कर दी है।
इसी कड़ी में प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में रिक्त कुल 119 पदों पर विशेषज्ञ डाक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है। इन नियुक्तियों के बाद जिला स्तर पर मरीजों को बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा।
जिला अस्पतालों में आपरेशन और गंभीर उपचार के लिए सबसे अधिक आवश्यकता निश्चेतना विशेषज्ञों की होती है। वर्तमान में इनकी कमी के कारण कई जगह आपरेशन टालने पड़ते हैं, जिसे देखते हुए मिशन द्वारा सर्वाधिक 44 पद भरे जा रहे हैं। कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में विशेषज्ञों को तैनात करने के लिए विभाग 'यू कोट वी पे' जैसी योजना का सहारा ले रहा है, ताकि योग्य डाक्टर खुद अपनी पसंद का मानदेय प्रस्तावित कर सकें।
इसके अलावा ग्वालियर, जबलपुर, रीवा और सागर सहित कई छोटे जिलों के 25 केंद्रों पर रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की जा रही है। इससे अस्पतालों में एक्स-रे, सीटी स्कैन और सोनोग्राफी जैसी जांच सेवाओं में व्यापक सुधार होगा। साथ ही शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से 23 शिशु रोग विशेषज्ञों और 11 स्त्री रोग विशेषज्ञों का चयन किया जा रहा है।
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शहरी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती देने के लिए दतिया, कटनी और रायसेन जैसे जिलों के संजीवनी क्लीनिकों के लिए 20 मेडिकल ऑफिसर नियुक्त किए जा रहे हैं। वहीं, आगर मालवा और अलीराजपुर जैसे जिलों में ब्लड बैंक सेवाओं के लिए छह विशेषज्ञ तैनात होंगे।
विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए पारदर्शी तरीके से चयन प्रक्रिया अपनाई जा रही है। विशेषकर निश्चेतना और रेडियोलाजी जैसे क्षेत्रों में डाक्टरों की नियुक्ति से जिला अस्पतालों की कार्यक्षमता बढ़ेगी। 'यू कोट वी पे' के माध्यम से हम दूरस्थ जिलों में भी विशेषज्ञों की सेवाएं सुनिश्चित कर रहे हैं।- दिशा प्रणय नागवंशी, अपर मिशन संचालक, एनएचएम