
आदित्य कुमार, नईदुनिया। आमतौर पर लाल बत्ती, आईएएस की कुर्सी या आईपीएस के स्टार जिसके पास हो, उसका रुतबा सबसे अलग माना जाता है। लेकिन, बीते कुछ समय के मध्य प्रदेश में इस रसूख की आड़ में महाठगी का खेल खेला जा रहा है। फर्जीवाड़ा ऐसा कि आम लोग तो आम, पुलिस, प्रशासन और फाइव-स्टार होटलों तक को इसका शिकार बनाया जा रहा है।
चाय की टपरी से लेकर बड़े-बड़े होटलों के सूट तक, दिल्ली के मुखर्जी नगर से लेकर उज्जैन के महाकाल मंदिर के प्रोटोकॉल सेल तक... आज की कहानी में हम ऐसे पांच हाई-प्रोफाइल 'फर्जी अधिकारियों' की बात करेंगे, जिन्होंने फर्जी आईडी, घटिया स्पेलिंग वाले अपॉइंटमेंट लेटर और रसूख के झूठे आडंबर से करोड़ों का फर्जीवाड़ा रच डाला।
खुद को MPSTDC में एडिशनल डायरेक्टर और ट्रेनी आईएएस बताने वाली तृप्ति सिंह का ठगी नेटवर्क काफी बड़ा था। आरोपी पर भोपाल और अशोकनगर में 4 FIR दर्ज हुई है।
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मोडस ऑपरेंडी: बता दें कि तृप्ति का रौब ऐसा था कि वह 'भारत सरकार' की नेमप्लेट लगी लग्जरी इनोवा कार से चलती थी। उसने सरकारी नौकरी का झांसा देकर युवाओं से लाखों रुपए की ठगी की है। उसने सिवनी, बालाघाट में भी लाखों की ठगी की है।
पुलिस छापे में आरोपी के घर से कई महंगे आईफोन, बड़े-बड़े होटलों के बिल, फ्लाइट के टिकट औऱ फर्जी डॉक्यूमेंट बरामद हुए है। इस चीजों का इस्तेमाल वह लोगों को जाल में फंसाने के लिए करती थी।
ग्वालियर का रहने वाला 8वीं पास विकास कभी दिल्ली के मुखर्जी नगर में कोचिंग सेंटर के बाहर चाय बेचता था। यहीं उसे सिविल सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच रहते-रहते आईएएस/आईपीएस के रुतबे का चस्का लगा। चस्का ऐसा कि उसने खुद को 'आईएएस अधिकारी' बना डाला।
मोडस ऑपरेंडी: साल 2020 में यूपीएससी का रिजल्ट आते ही उसने इंस्टाग्राम पर चयनित अभ्यर्थियों की लिस्ट डालकर अपनी आईडी @Vikashyadav_ips बना ली। देखते-ही-देखते उसके सोशल मीडिया पर करीब 20 हजार फॉलोअर्स हो गए।
यहां उसकी हिम्मत और बढ़ी और उसने खुद को ट्रेनी आईपीएस बताकर एक महिला डॉक्टर से दोस्ती की और मां के इलाज के नाम पर 25 हजार ठग लिए। मामला साइबर सेल में पहुंचा और दिल्ली पुलिस ने जब उसके ग्वालियर के घर पर रेड मारी तो उसका पर्दाफाश हुआ।
झांसी यूनिवर्सिटी से मास्टर्स कर चुका युवक ऋषि कुमार यादव बेरोजगार था, मगर उसने भोपाल में UPSC की कोचिंग कर रहे छात्रों को अपना शिकार बनाया। खुद को 2016 बैच का IPS अफसर बताया।

मोडस ऑपरेंडी: एमपी नगर के अन्नपूर्णा कैफे में उसने कुछ लड़को को इनकम टैक्स विभाग में नौकरी का झांसा देकर 1-1 लाख रुपए मांगे। इतना ही नहीं, उसने अपनी पत्नी के भी दिल्ली के आबकारी विभाग का IPS बताया।
पुराना आईडी कार्ड को एडिट कर आरोपी ने अपना फर्जी आईडी और जॉइनिंग लेटर बनाया। फर्जी अफसर ने लेटर तो बनाया, मगर उसमें कई स्पेलिंग मिस्टेक थे। छात्रों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए हालात भांप लिए और शिकायत की। एमपी नगर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया।
गुजरात में पहले भी नकली थानेदार बनकर अवैध वसूली के आरोप में पकड़ा जा चुका हिमांशु पांचाल करीब एक महीने पहले अपनी मां के साथ इंदौर आया और ओमेक्स सिटी में 15 हजार रुपये महीने का किराए का मकान लिया।
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मोडस ऑपरेंडी: उसने मकान के बाहर बाकायदा ‘IAS राज सोनी, जिला कलेक्टर’ की नेमप्लेट लगाई। 2,500 रुपये रोजाना के किराए पर कार और ड्राइवर रखा। ड्राइवरों को झांसा देता था कि उसकी जल्द पोस्टिंग होने वाली है और वह उन्हें स्थायी सरकारी नौकरी दिलवा देगा।
पुलिस जब उसके किराए के मकान में पहुंची, तो कमरा देखकर हैरान रह गई। उसने सीलिंग पर रुई लगाकर कमरे को 'बादलों' की तरह सजा रखा था, जिसमें आरजीबी (RGB) लाइट्स और जगह-जगह 'IAS' लिखी फोटो लगी थीं। उसने बायपास स्थित एक सितारा होटल में ड्राइवरों के परिवार के लिए पार्टी रखी। 16 हजार रुपये का बिल बनने पर रजिस्टर में 'IAS राज सोनी' लिखकर रिव्यू दिया और रौब झाड़ते हुए कहा - "मेरा पीए बिल चुका देगा।" होटल प्रबंधन को शक हुआ और लसूड़िया पुलिस ने मौके पर दबिश देकर 'साहब' का पर्दाफाश कर दिया।
आमतौर पर उज्जैन के महाकाल मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती का VIP पास मिलना काफी मुश्किल होता है। इसी का फायदा उठाने दिल्ली से उज्जैन पहुंचा अतुल कुमार।
मोडस ऑपरेंडी: उसने खुद को भारत सरकार के उड्डयन मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी बताकर न केवल सर्किट हाउस में बिना उचित दस्तावेज के दो कमरे बुक करा लिए, बल्कि महाकाल मंदिर के अधिकारियों पर तड़के 4 बजे होने वाली भस्म आरती में VIP ट्रीटमेंट देने का भारी दबाव बनाया।
जब अधिकारियों ने आरोपी से प्रमाण मांगा तो पहले वह बात टालने लगा फिर रौब झाड़ते हुए कहा कि परिवार के कई लोग आईएएस है। साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार का पत्र होने की बात भी कही। महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल और मंदिर प्रबंधन ने जब उड्डयन मंत्रालय में सीधे क्रॉस-वेरिफिेकेशन किया, तो पता चला कि इस नाम का कोई जॉइंट सेक्रेटरी है ही नहीं। पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया।
एमपी के यह पांच मामले साबित करते हैं कि ठग जनता के मन में मौजूद 'पावर और रसूख' के खौफ तथा 'सरकारी नौकरी और वीआईपी कल्चर' के लालच का फायदा उठाते हैं। महंगे होटलों का झूठा आडंबर हो या सोशल मीडिया पर दिखने वाली झूठी जिंदगी... कुछ लोग अपनी रसूख हो जमाने और बढ़ाने के लिए ऐसे तरकीब अपनाते है। लेकिन हां, प्रशासन की सतर्कता और आम जनता की सजगता, ऐसे लोगों के जल्द की सलाखों ने पीछे भेज देती है।