MP में 6 लीटर या ज्यादा दूध देने वाली गाय के पालक को मिलेगा ₹1 लाख का इनाम, गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना की शर्तें तय
एक दिन में छह लीटर या अधिक दूध देने वाली गाय के पालक प्रतियोगिता में शामिल हो सकेंगे। पहले तीन स्थानों पर एक लाख, 50 हजार और 25 हजार रुपये के पुरस्कार...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 19 Oct 2026 12:00:30 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Oct 2026 12:00:30 PM (IST)
गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना की शर्तें तय कर दी गई हैं। फोटो एआई से तैयार की गई है।HighLights
- छह लीटर या अधिक दूध देने वाली गाय के पालक रहेंगे शामिल
- पहले तीन स्थानों पर 1 लाख, 50 हजार और 25 हजार रुपये के पुरस्कार
- सरकार का लक्ष्य दुग्ध उत्पादन को 9 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करना है
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में गोवंश पालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना की शर्तें तय कर दी गई हैं। योजना के तहत एक दिन में छह लीटर या इससे अधिक दूध देने वाली गाय के पालक को प्रतियोगिता में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
दूध उत्पादन के आधार पर तैयार मेरिट सूची में पहले तीन स्थान हासिल करने वाले गोपालकों को क्रमशः एक लाख, 50 हजार और 25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
ब्लाक स्तर पर प्रतियोगिता
सरकार ने इसके लिए प्रदेश के 313 ब्लाकों में एक-एक वृंदावन गांव का चयन किया है। इन्हीं गांवों के पात्र गोपालक प्रतियोगिता में भाग ले सकेंगे। प्रतियोगिता से पहले प्रतिभागियों का पंजीयन किया जाएगा।
प्रत्येक ब्लाक में दो दिवसीय आयोजन होगा, जिसके लिए सरकार 50 हजार रुपये खर्च करेगी। इस राशि से प्रतिभागियों की गायों के चारे-पानी, टेंट-पंडाल और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का खर्च वहन किया जाएगा।
दो हजार से कम आबादी वाले गांवों का चयन
योजना के तहत ऐसे गांवों को वृंदावन गांव के रूप में चुना गया है, जिनकी आबादी 2000 से कम है और जहां कम से कम 500 गोवंश का पालन होता है। सरकार का उद्देश्य इन गांवों में पशुपालन को प्रोत्साहित करना और बेहतर दुग्ध उत्पादन करने वाले गोपालकों को सम्मानित करना है।
मुख्यमंत्री ने तीन अक्टूबर 2026 को इस योजना की घोषणा की थी। फिलहाल इसे चयनित वृंदावन गांवों तक सीमित रखा गया है। आगे चलकर योजना का विस्तार करने की तैयारी है।
पांच साल में खर्च होंगे 35 करोड़ रुपये
गोपालकृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना को हर साल आयोजित करने की तैयारी है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल में करीब 35 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। योजना पर सालाना लगभग 7.05 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें पुरस्कार राशि के साथ प्रतियोगिता के आयोजन पर होने वाला खर्च भी शामिल है।
दूध उत्पादन 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य
प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए इसे मौजूदा नौ प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से दूध संकलन को भी 10 लाख लीटर से बढ़ाकर 50 लाख लीटर तक पहुंचाने की योजना है।
इसके साथ ही गिर, साहीवाल और थारपारकर जैसी उन्नत नस्लों की गायों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। प्रतियोगिता के माध्यम से अधिक दूध देने वाली गायों की पहचान करने और गोपालकों को बेहतर नस्ल के पशुपालन के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार को उम्मीद है कि इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों और पशुपालकों की आय में भी वृद्धि होगी।