
दीपक विश्वकर्मा, भोपाल MP Government । महाराष्ट्र सरकार ने गत दिनों संपत्ति के पंजीयन पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी में दो फीसद की कमी कर दी है, लेकिन इससे उलट मध्य प्रदेश सरकार देशभर में सबसे ज्यादा स्टाम्प ड्यूटी वसूल रही है। इस कारण मप्र का रियल एस्टेट मार्केट बदहाल हो रहा है। रही सही कसर कोरोना ने तोड़ दी है। अधिकतर राज्यों में अब स्टाम्प ड्यूटी 7 से 12 फीसद तक है। वहीं मप्र सरकार 12.5 फीसद ड्यूटी वसूल रही है। बता दें कि वर्ष 2010 में मप्र में स्टाम्प ड्यूटी पांच फीसदी के करीब थी। इस पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगता था।
लेकिन बीते 10 वर्षों में स्टाम्प ड्यूटी में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने कलेक्टर गाइडलाइन में 20 फीसद की छूट तो दी, लेकिन स्टाम्प ड्यूटी बढ़ा दी। इस कारण आम जनता को जो राहत मिलने वाली थी वह नाकाफी साबित हुई। क्रेडाई के नेशनल चेयरमैन सतीश मागर ने बताया कि स्टाम्प ड्यूटी कम करने से लोग प्रोत्साहित होते हैं, ताकि वे अपना घर खरीदने का सपना साकार कर पाएं। इससे रोजगार से लेकर दूसरे सेक्टरों में भी फायदा होता है।
रियल एस्टेट सेक्टर के जानकारों का कहना है कि सरकार-2022 तक सबको आवास की सुविधा मुहैया कराना चाहती है, लेकिन इसके लिए लोगों को इन्सेंटिव देने से बच रही है। अग्रवाल कंस्ट्रक्शन के एमडी संजीव अग्रवाल बताते हैं कि बीते 10 सालों से मप्र सरकार से स्टाम्प ड्यूटी कम करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उलटा बढ़ा देती है।
मप्र में कोरोना काल में 900 करोड़ का नुकसान
कोरोना के कारण स्टाम्प ड्यूटी से आय में अप्रैल से जुलाई के बीच मप्र में भी 900 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अन्य राज्यों की भी यही स्थिति है। रियल एस्टेट सेक्टर कृषि के बाद 10 से 12 करोड़ रोजगार सृजित करता है। जीडीपी में भी इसकी हिस्सेदारी 14 फीसद तक है। सीमेंट, स्टील समेत करीब 269 से ज्यादा सहायक उद्योग इसी पर निर्भर हैं। यदि स्टाम्प ड्यूटी में छूट मिलती है तो लोग अपने फ्लैट्स आदि का तत्काल रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इससे बिल्डरों को प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए पैसा मिल सकेगा।
काम शुरू होने से सरकारों को कर्मकार शुल्क, जीएसटी समेत कई तरह से आय हो सकेगी।भोपाल में प्रतिदिन औसत 150 रजिस्ट्रियां इधर, भोपाल शहर में रजिस्ट्री की संख्या में भारी गिरावट आई है। जहां आम दिनों में यहां 300 रजिस्ट्री प्रतिदिन होती थी वहीं अब महज 150 रजिस्ट्री ही हो पा रही हैं।
इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि रजिस्ट्री की दर में 50 फीसद की गिरावट हो चुकी है। अब भी अगर सरकार स्टाम्प ड्यूटी में कुछ कटौती करती है तो रजिस्ट्री की यह संख्या फिर से बढ सकती है।
यहां है इतने फीसद स्टाम्प शुल्क
राज्य - प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन खर्च (फीसद में)
मध्यप्रदेश - 12.5
राजस्थान - 11
गुजरात - 10
कर्नाटक - 10
छत्तीसगढ़ - 8.25
उत्तर प्रदेश- 8
महाराष्ट्र - 4
पंजाब - 6
दिल्ली - 7
हरियाणा - 7
- राज्य के पास आय के दूसरे स्रोत कम हैं। इसके चलते सरकार को हुए नुकसान के कारण दरों पर पुनर्विचार करेंगे। - जगदीश देवडा, वाणिज्यिक कर मंत्री, मप्र