राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण के लिए अब राज्य सरकार कानून बनाने के स्थान पर नियम लाएगी। इसमें वे सभी प्रावधान रहेंगे, जो भारत सरकार द्वारा सुझाए गए हैं। कोचिंग संचालकों को भवन में फायर सेफ्टी एक्ट का पालन करना होगा। शिक्षक की योग्यता सार्वजनिक करनी होगी।
किसी भी विद्यार्थी को पांच घंटे से अधिक नहीं पढ़ाया जाएगा। विज्ञापन में सौ प्रतिशत चयन की गारंटी, जैसे दावे भी नहीं किए जा सकेंगे।
हादसों से मिला सबक
दरअसल, राज्य सरकार का मानना है कि कानून बनाकर सख्ती करने के लिए बहुत से प्रावधान करने होंगे। इसमें समय लग सकता है इसलिए नियम बनाकर ही कोचिंग संस्थानों को विनियमित किया जाएगा।
नई दिल्ली और कोटा सहित अन्य स्थानों में कोचिंग संस्थानों में हुए जानलेवा हादसों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में भारत सरकार को निर्देश दिए थे कि कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए कानून बनाया जाए।
इस पर भारत सरकार ने विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और अनुचित फीस वसूली को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाने मॉडल प्रारूप भेजा था। उच्च शिक्षा विभाग ने विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक प्रस्तुत करने के लिए प्रारूप भी तैयार कर लिया है।
इसमें कोचिंग संस्थानों के पंजीयन, फायर सेफ्टी और भवन सुरक्षा के अलावा विद्यार्थियों के प्रवेश, बैठक व्यवस्था से लेकर अन्य कई प्रावधान शामिल किए गए थे लेकिन अब तय किया गया है कि कानून के स्थान पर नियम बनाकर लागू किए जाएंगे।
पहले भी 26 अप्रैल 2024 को कोचिंग संस्थानों के विनियमन के लिए कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे लेकिन ये कारगर सिद्ध नहीं हुए।
फीस, पढ़ाई से लेकर विज्ञापन तक कंट्रोल
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अभी फीस से लेकर पढ़ाने, शिक्षक रखने, बैठक व्यवस्था सहित अन्य प्रक्रिया पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं है।
जिला प्रशासन, नगरीय विकास, ऊर्जा विभाग अपने-अपने हिसाब से कार्रवाई करते हैं। कानून व्यवस्था के हिसाब से पुलिस अपना काम करती है लेकिन एकरूपता नहीं है। नियम में सबको समाहित किया जाएगा।
कोई भी कोचिंग संस्थान बिना पंजीयन के संचालित नहीं होगा। पंजीयन के लिए भवन अनुज्ञा, फायर सेफ्टी सहित अन्य प्रविधानों का पालन करना होगा। नियम का उल्लंघन करने पर एक बार में 25 हजार और उससे अधिक बार में 1 लाख रुपये तक अर्थदंड लगाया जा सकेगा।
16 वर्ष से पहले कम आयु में प्रवेश नहीं
अभी 12-13 साल की आयु से ही बच्चों को कोचिंग में डाल दिया जाता है। घंटों लगातार पढ़ाया जाता है। बार-बार टेस्ट होते हैं। इससे बच्चे मानसिक दबाव में रहते हैं। नई व्यवस्था में 16 वर्ष से कम आयु में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। मनोवैज्ञानिक सहायता और काउंसलिंग की व्यवस्था भी रखनी होगी।
नैतिक अपराध में दोषी किसी व्यक्ति को अध्यापन कार्य के लिए नहीं रखा जा सकेगा। शिक्षक का पूरा ब्योरा सहित संस्थान को अपनी पूरी जानकारी वेबसाइट पर साझा करनी होगी। कम से कम स्नातक स्तर का शिक्षक रखना होगा। कोचिंग संस्थान सौ प्रतिशत चयन की गारंटी जैसे विज्ञापन भी नहीं दे सकेगा।
पांच घंटे से अधिक नहीं होगी पढ़ाई
कोचिंग संस्थानों में सुबह से देर रात तक बच्चों को पढ़ाया जाता है। कोचिंग के बाद वहीं अभ्यास और स्व-अध्ययन कराया जाता है। ऐसा भी नहीं किया जा सकेगा। किसी विद्यार्थी को पांच घंटे से अधिक नहीं पढ़ाया जाएगा। यदि कोई विद्यार्थी बीच में कोचिंग छोड़ देता है तो संस्थान को अनुपातिक रूप से निश्चित समयसीमा में फीस वापस करनी होगी।
नियम से ही विनियमित करेंगे
पहले विधेयक लाने की तैयारी की जा रही थी। सभी पहलूओं पर विचार करने के बाद नियम के माध्यम से कोचिंग संस्थानों को विनियमित किया जाएगा।- अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा विभाग