
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार अब सख्त और सहूलियत दोनों रास्तों पर चल रही है। अनिवार्य ग्रामीण सेवा का बांड पूरा नहीं करने वाले डॉक्टरों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। वर्ष 2022 के बाद डिग्री पूरी करने के बाद भी ग्रामीण सेवा जॉइन नहीं करने वाले डॉक्टरों की सूची तैयार की जा रही है। ऐसे डॉक्टरों का मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल से पंजीयन निलंबित करने की कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार ने वर्ष 2022 में ही अधिसूचना जारी कर दी थी कि डिग्री पाठ्यक्रम पूरा होने के दो साल के भीतर डॉक्टर ने सेवा जॉइन नहीं की तो उसका मेडिकल पंजीयन निलंबित या रद्द किया जा सकता है। अब इसी प्रावधान के तहत पुराने बांड डिफॉल्टर डॉक्टरों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। सभी जिलों के सीएमएचओ से ऐसे डॉक्टरों की सूची मांगी गई है जिन्होंने बांड के तहत अपनी सेवा अवधि पूरी नहीं की है।
इस साल बांड व्यवस्था के तहत डॉक्टरों की जॉइनिंग में बड़ा सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2026 में 3,118 बांडेड डॉक्टरों की पोस्टिंग की गई, जिनमें से 2,601 यानी 83 प्रतिशत डॉक्टरों ने जॉइन कर लिया है। इसके उलट वर्ष 2024 में 2,670 में से सिर्फ 1,116 और वर्ष 2025 में 2,789 में से 1,103 डॉक्टरों ने ही सेवा शुरू की थी। दोनों वर्षों में जॉइनिंग का औसत सिर्फ 40 प्रतिशत रहा था।
डॉक्टर जॉइन तो कर रहे हैं, लेकिन बीच में छोड़कर न जाएं, इसके लिए सरकार उन्हें बेहतर माहौल देने की तैयारी में है। स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह ने सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि बांडेड डॉक्टरों की सुरक्षा, उनके रुकने की सुविधा और अस्पताल में जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। पहली बार इस तरह का पत्र जारी किया गया है।
इसके अलावा उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल भी सांसद-विधायकों को पत्र लिखने जा रहे हैं कि वे बांडेड डॉक्टरों को प्रोत्साहित करें। स्थानीय स्तर पर उनकी समस्याएं सुनें और उनका समाधान करें।
सरकारी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले सामान्य वर्ग के डॉक्टरों के लिए ग्रामीण क्षेत्र में एक साल की सेवा अनिवार्य है। सेवा नहीं करने पर 10 लाख रुपये की बांड राशि भरने का प्रावधान है। आरक्षित वर्ग के लिए यह राशि पांच लाख रुपये है। वहीं गैर-सेवारत पीजी डॉक्टरों के लिए भी एक साल की ग्रामीण सेवा और 10 लाख रुपये की बांड राशि का प्रावधान है। कुछ अन्य श्रेणियों में सेवा अवधि और बांड राशि इससे अधिक है।
डॉक्टरों के ग्रामीण सेवा जॉइन नहीं करने या बीच में छोड़ने के कई कारण सामने आए हैं। सबसे बड़ा कारण पीजी या आगे की पढ़ाई की तैयारी के दौरान ग्रामीण पदस्थापना को अतिरिक्त बोझ मानना है। ग्रामीण अस्पतालों में जरूरी जांच और उपचार की सुविधाएं सीमित हैं। अस्पतालों में डॉक्टर के साथ पर्याप्त नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ भी नहीं होता।
कई जगह आवास की सुविधा नहीं है, जिससे परिवार के साथ रहने में परेशानी होती है, वहीं दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में आने-जाने की समस्या भी है। मानदेय भी एक बड़ा कारण है। बांडेड डॉक्टरों में एमबीबीएस डिग्रीधारी को 55 हजार रुपये और एमडी-एमएस वालों को 58 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है, जो एमडी-एमएस में मिलने वाली छात्रवृत्ति से भी कम है। साथ ही महीने में सिर्फ एक आकस्मिक अवकाश के अलावा किसी तरह की छुट्टी की पात्रता नहीं है।
बांडेड डॉक्टरों को ज्वाइन करने और बांड अवधि पूरी करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। जिन्होंने बीच में सेवा छोड़ी उनके लिए विशेष पोर्टल बनाकर फिर ज्वॉइनिंग का अवसर दिया जा रहा है। इस वर्ष बड़ी संख्या में डॉक्टरों ने ज्वाइन भी किया है।
-राजेंद्र शुक्ल उप मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा