
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जबलपुर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति दीपक खोट की एकलपीठ ने राज्य सरकार को अदालती आदेश का अनुपालन करने के लिए चार सप्ताह का अंतिम समय दिया है।
अदालत के इस फैसले से शिक्षकों की वरिष्ठता, वेतन वृद्धि, पेंशन और एरियर जैसे लंबित वित्तीय व सेवा संबंधी लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा लाभ मिलने पर वेतन में हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसके अलावा, छठवें वेतनमान की पात्रता 1 जनवरी 2006 से माने जाने पर करीब 10 साल का एरियर भी मिलेगा, जो प्रति शिक्षक लगभग 7 से 8 लाख रुपये (12 प्रतिशत संभावित ब्याज सहित) तक हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के पूर्व फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया था। इसके बाद दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को चार हफ्ते की मोहलत दी है। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में तय की गई है।
राजेश पांडेय सहित 497 अध्यापकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी 2018 से पूर्व की शिक्षकीय सेवाओं को संविलियन में शामिल न करने के सरकारी फैसले को चुनौती दी थी। याचियों का तर्क था कि पहली नियुक्ति की तिथि से सेवा अवधि की गणना कर वरिष्ठता और सभी देय लाभ प्रदान किए जाएं।
मामले में शिक्षक नेताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से अपील निरस्त होने के बाद अब सरकार को बिना विलंब किए हाईकोर्ट के आदेश पर अमल करना चाहिए।
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दूसरी ओर, प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा दो दिनों के भीतर 600 से अधिक दिवंगत शिक्षकों व कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र जारी करने के त्वरित कदम का स्वागत किया है। संगठनों ने इस मानवीय पहल के लिए राज्य सरकार और विभागीय अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।