
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकार और आम नागरिकों के बीच पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की जा रही है। आगामी नवंबर माह से आयोजित होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र से 'प्रश्नकाल' का सीधा प्रसारण शुरू होगा। इसके माध्यम से राज्य के नागरिक एक विशेष ऑनलाइन लिंक के ज़रिए घर बैठे ही सदन के भीतर चल रही गतिविधियों के प्रत्यक्ष साक्षी बन सकेंगे।
इसके साथ ही, मध्य प्रदेश की विधानसभा राष्ट्रीय स्तर के 'वन नेशन, वन प्लेटफॉर्म' फ्रेमवर्क का हिस्सा बन जाएगी। जनता तक सीधी पहुंच बनाने के लिए विधानसभा प्रशासन एक आधिकारिक डिजिटल लिंक जारी करेगा। इसके ज़रिए जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा उठाए जा रहे प्रश्नों को सार्वजनिक रूप से ऑनलाइन देखा जा सकेगा। यह पूरी प्रक्रिया 'ई-विधान' परियोजना के व्यापक विस्तार का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत पूरे सदन को तकनीक से जोड़ा जा रहा है।
पूर्व में विधानसभा की बहसों व प्रश्नकाल को देखने की सुविधा केवल दर्शक दीर्घा या कुछ सीमित माध्यमों तक ही सीमित थी। हालांकि, इस व्यवस्था के लागू होने से आम मतदाता यह जान सकेंगे कि उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि उनके क्षेत्र की समस्याओं को सदन में किस तरह उठा रहे हैं और शासन से उन्हें क्या उत्तर मिल रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह कदम जन-संवाद को सशक्त और अधिक पारदर्शी बनाएगा।
सदन की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रूप देने के लिए विधायकों की मेज पर अत्याधुनिक टैबलेट स्थापित किए जा चुके हैं। इस प्रणाली के तहत विधायकों द्वारा पूछे जाने वाले सवाल तथा विभिन्न विभागों द्वारा दिए जाने वाले उत्तर ऑनलाइन माध्यम से ही प्रेषित किए जाएंगे। तकनीक के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सभी मंत्रियों एवं विधायकों को 'नेवा' वर्कशॉप के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
केंद्रीय परिकल्पना के तहत मध्य प्रदेश विधानसभा को पूरी तरह डिजिटल माध्यमों से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य सदन की हर गतिविधि को टीवी और अन्य डिजिटल माध्यमों के ज़रिए सुलभ बनाना है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर स्वयं इस पूरे प्रोजेक्ट की प्रगति पर नज़र बनाए हुए हैं और उन्होंने आगामी शीतकालीन सत्र तक सभी आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।