
MP Lok Sabha Election 2024: धनंजय प्रताप सिंह, भोपाल। मध्य प्रदेश वैसे तो भाजपा का गढ़ है ही लेकिन प्रदेश की चार लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां 35 वर्ष से लगातार भाजपा जीत रही है। भोपाल, इंदौर, विदिशा और भिंड संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं ने भाजपा को लगातार जिताने का रिकार्ड बनाया है। वर्ष 1989 से अब तक नौ लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। इंदौर से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन आठ बार सांसद रहीं।
वर्ष 2019 में हुए चुनाव में यहां से शंकर लालवानी को टिकट मिला तो वह भी रिकार्ड वोटों से जीते। विदिशा से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी विजयी हुए थे। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी यहां से जीतीं।
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह भी कई बार सांसद चुने जाने के बाद यहां से मैदान में हैं। भोपाल में भाजपा से चेहरे बदले जाते रहे लेकिन सभी ने जीत हासिल की। भिंड में भी कुछ ऐसा ही है। विधानसभा चुनाव में इन संसदीय सीट में मत प्रतिशत में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव हो सकता है लेकिन लोकसभा चुनाव में ये क्षेत्र भाजपा के साथ ही खड़े रहे हैं।
दरअसल, विदिशा का इतिहास भी ऐसा रहा है कि वहां की राजनीति पर हिंदुत्व का गहरा रंग रहा है। वर्ष 1940 से हिंदू महासभा, जनसंघ और बाद में भाजपा की कोशिशों का यह रंग सर्वसमावेशी बन चुका है। लंबे समय से यह सीट भाजपा की जीत का सुरक्षित गढ़ बनी हुई है।
यह सीट वर्ष 1991 में उस समय सुर्खियों में रही जब भाजपा के शीर्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने लखनऊ के साथ यहां से भी अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। उन्होंने दोनों सीटों पर जीत हासिल की लेकिन बाद में विदिशा सीट से इस्तीफा दे दिया। अटलजी के इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में उनके उत्तराधिकारी के रूप में शिवराज सिंह चौहान मैदान में उतरे और बड़े अंतर से जीत गए।

शिवराज सिंह ने क्षेत्र में अपनी जड़ें मजबूत कीं। वे लगातार पांच बार सांसद चुने गए। कांग्रेस इस सीट पर हर बार प्रत्याशी बदलती रही लेकिन क्षेत्र के मतदाताओं ने वर्ष 1980 और 1984 के अलावा मौका नहीं दिया। वर्ष 1971 में जब इंदिरा लहर में भी विदिशा सीट पर जनसंघ का दबदबा कायम रहा।
विधानसभा के समीकरण
कुल सीट- आठ
भाजपा-सात
कांग्रेस-एक
मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी कही जाने वाली सीट इंदौर पिछले 35 वर्षों से भाजपा के साथ है। यहां से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने लगातार आठ बार सांसद रहीं। पिछले चुनाव में भाजपा ने यहां से शंकर ललवानी को टिकट दिया तो वे भी पांच लाख से ज्यादा मतों से चुनाव जीते। सबसे पहले सुमित्रा ताई ने यहां से 1989 में कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रकाश चंद्र सेठी को चुनाव हराया था।
विधानसभा के समीकरण
भाजपा - आठ
कांग्रेस - शून्य
भोपाल संसदीय सीट भी 1989 से ही भाजपा के कब्जे में है। सबसे पहले पूर्व मुख्यसचिव रहे सुशील चंद्र वर्मा ने कांग्रेस के केएन प्रधान को हराकर भाेपाल सीट पर कब्जा जमाया था, वर्मा 2004 तक चार बार यहां से सांसद रहे। वे भोपाल में बेहद लोकप्रिय थे, लोग उन्हें पोस्टकार्ड वाले सांसद जी कहते थे। वर्मा अपना पता लिखा पोसटकार्ड क्षेत्र में बांटते थे ताकि कोई भी उन्हें अपनी समस्या से अवगत करा सके। तब से केवल चेहरे बदले लेकिन सीट भाजपा के पास ही रही। भाजपा की ओर से इस सीट से कैलाश जोशी, उमा भारती जैसे दिग्गज भी भोपाल से सांद रह चुके हैं।
विधानसभा के समीकरण
भाजपा - छह
कांग्रेस - दो
ग्वालियर- चंबल अंचल में भिंड सीट वैसे 2009 से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है लेकिन यहां भाजपा के ऐसे पैर जमे कि पिछले 35 वर्ष से कांग्रेस हिला नहीं पाई। पहले 1971 विजयाराजे सिंधिया भिंड-दतिया लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। भिंड, जिसे सीमा की रक्षा के लिए सबसे ज्यादा वीर सपूतों देने के लिए जाना जाता है। 1989 में नरसिंह राव दीक्षित यहां से जीते थे, तब से भाजपा निरंतर जीत रही है। इस चुनाव में यहां भाजपा को चुनौती मिल सकती है।
विधानसभा के समीकरण
भाजपा - चार
कांग्रेस - चार
मध्य प्रदेश पूर्णत: भाजपा की विचारधारा के पक्ष में मतदान करता आया है और लोकसभा के परिणामों में छिंदवाड़ा को छोड़कर भाजपामूलक मतदान ही होता आया है। इस बार हमें विश्वास है कि सभी 29 सीट जीतेंगे। कांग्रेस अपना अस्तित्व खो चुकी है। - डा हितेश वाजपेयी, प्रवक्ता भाजपा।