एक ने पत्नी की अश्लील वीडियो वायरल की, दूसरी अधिकारी बनी तो पति से बनाई दूरी, महिला आयोग में पहुंचे अनोखे मामले
राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में 28 मामलों की सुनवाई हुई। एक दंपती में समझौता हुआ, जबकि दहेज प्रताड़ना, वीडियो वायरल और पारिवारिक विवाद मामलों में निर्देश दिए गए।
Publish Date: Tue, 21 Jul 2026 01:45:07 PM (IST)Updated Date: Tue, 21 Jul 2026 01:45:07 PM (IST)
महिला आयोग में पहुंचे अनोखे मामले। (फाइल फोटो)HighLights
- महिला आयोग ने सोम को 28 मामलों की सुनवाई की।
- पति ने गलती मानवारकर पत्नी से माफी मांगकर समझौता किया।
- पत्नी की वीडियो वायरल मामले में अगली सुनवाई तय हुई।
डिजिटल डेस्क। मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की सोमवार को आयोजित जनसुनवाई में घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, पारिवारिक विवाद और साइबर उत्पीड़न से जुड़े कुल 28 मामलों की सुनवाई की गई। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आवश्यक निर्देश दिए।
एक मामले में पति ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पत्नी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी, जिसके बाद दोनों ने अपने रिश्ते को एक और मौका देने का फैसला किया। वहीं, कुछ मामलों में गंभीर आरोप सामने आने पर आयोग ने अगली सुनवाई तय की।
माफी के बाद दंपती ने साथ रहने का लिया फैसला
- घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले में पति ने आयोग के समक्ष अपनी गलती स्वीकार करते हुए कान पकड़कर पत्नी से माफी मांगी और भविष्य में ऐसा व्यवहार नहीं दोहराने का भरोसा दिया। इसके बाद दोनों के बीच समझौता हो गया।
- पीड़िता ने बताया कि शिकायत के बाद करीब एक वर्ष तक अलग रहने से उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि, दो वर्ष के बेटे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दोनों ने फिर से साथ रहने का निर्णय लिया।
वीडियो वायरल करने के आरोप पर अगली सुनवाई
दहेज प्रताड़ना से जुड़े एक अन्य मामले में महिला ने आरोप लगाया कि पति ने बाथरूम और कपड़े बदलते समय उसकी फोटो और वीडियो बनाकर बिना अनुमति सोशल मीडिया पर साझा कर दिए। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे अगली बेंच की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
18 साल बाद अधिकारी बनी पत्नी पर विवाद
एक पारिवारिक विवाद में पति ने दावा किया कि उसने पत्नी की पढ़ाई में पूरा सहयोग किया और शादी के 18 वर्ष बाद सरकारी अधिकारी बनने के बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया। पत्नी के अनुपस्थित रहने पर आयोग ने अगली जनसुनवाई में दोनों पक्षों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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