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भोपाल के बावड़िया में 22 अवैध मकानों पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, मालिकों को 15 दिन में खुद मकान तोड़ने के निर्देश

भोपाल के बावड़िया कलां स्थित शुभालय विहार में टीएंडसीपी के स्वीकृत नक्शे के विपरीत बने 22 मकानों पर नगर निगम ने कार्रवाई शुरू की है।

By Digital DeskEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Tue, 22 Sep 2026 01:47:34 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Sep 2026 01:52:56 PM (IST)
भोपाल के बावड़िया में 22 अवैध मकानों पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, मालिकों को 15 दिन में खुद मकान तोड़ने के निर्देश
शुभालय विहार में 22 अवैध मकानों पर कार्रवाई (AI Generated Image)

HighLights

  1. 5 एकड़ जमीन पर टीएंडसीपी नक्शे का उल्लंघन
  2. 38 रजिस्ट्रियों के 18.74 करोड़ गायब
  3. हाईकोर्ट अवमानना याचिका के बाद निगम सक्रिय

डिजिटल डेस्क, भोपाल। बावड़िया कलां स्थित शुभालय विहार में टीएंडसीपी के स्वीकृत नक्शे के विपरीत बने 22 मकानों पर नगर निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें 17 मकान मालिकों को नोटिस देकर 15 दिन में निर्माण खुद हटाने को कहा गया है। पांच अधूरे मकानों का निर्माण रोकने के नोटिस दिए गए हैं।

हाईकोर्ट में याचिका के बाद शुरू हुई कार्रवाई

इस कार्रवाई के पीछे की वजह यह है कि गौरव गृह निर्माण सहकारी संस्था की 5 एकड़ जमीन पर बने ये निर्माण टीएंडसीपी के स्वीकृत नक्शे के अनुरूप नहीं हैं। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका के बाद उपायुक्त सहकारिता ने 13 फरवरी 2026 को निगम को पत्र लिखा था। इसके बाद निगम ने कार्रवाई शुरू की।


खास बात है कि जिन मकानों को अब अवैध निर्माण बताकर हटाने के नोटिस दिए गए हैं, उन्हें नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा ने ही निर्माण की अनुमति दी थी। इससे निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

48 प्लॉट अवैध तरीके से बेचे गए

याचिकाकर्ता विवेक दीक्षित के मुताबिक, संस्था के 44 संस्थापक सदस्यों की जमीन पर 48 प्लॉट अवैध तरीके से बेचे गए थे। सहकारिता विभाग इनकी रजिस्ट्रियां शून्य कराने के लिए सिविल कोर्ट भी पहुंच चुका है।

38 रजिस्ट्रियों के 18.74 करोड़ रुपए गायब

फरवरी 2026 में सहकारिता विभाग की जांच में सामने आया कि 2018 से 2023 के बीच वास्तविक सदस्यों को दरकिनार कर बाहरी लोगों के नाम करीब 50 रजिस्ट्रियां की गईं। इनमें 32 अवैध पाई गई। 38 रजिस्ट्रियों के करीब 18.74 करोड़ रुपए संस्था के खाते में नहीं आए।

ऑडिटर अनिल कुमार रावत की रिपोर्ट के मुताबिक फर्जी दस्तावेजों और हैंडराइटिंग में हेरफेर कर वास्तविक सदस्यों का अधिकार छीना गया। ये रजिस्ट्रियां तत्कालीन अध्यक्ष अनिता विष्ट और तत्कालीन प्रबंधक मनोज साहू के कार्यकाल में हुई थीं।