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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 14, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

MP News: सरकारी स्कूलों में दूसरी कक्षा के 66 प्रतिशत बच्चे नहीं पहचान पाते अक्षर, 53 फीसदी को संख्या का ज्ञान नहीं

स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जारी की मिशन अंकुर की वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट। इस अभियान के तहत दूसरी व तीसरी कक्षा के बच्चों में सीखने की क्...और पढ़ें

By Anjali raiEdited By: Ravindra Soni
Publish Date: Fri, 14 Jun 2024 09:27:48 AM (IST)Updated Date: Fri, 14 Jun 2024 09:27:48 AM (IST)
MP News: सरकारी स्कूलों में दूसरी कक्षा के 66 प्रतिशत बच्चे नहीं पहचान पाते अक्षर, 53 फीसदी को संख्या का ज्ञान नहीं
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. मिशन अंकुर के तहत सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक दूसरी कक्षा के 58 प्रतिशत बच्चे तीन शब्दों का वाक्य नहीं पढ़ पाते।
  2. दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले 51 प्रतिशत बच्चों को 20 तक की संख्या को घटना भी नहीं आता है।
  3. सर्वे में तीसरी कक्षा के 40 प्रतिशत ऐसे बच्चे मिले, जिनको 99 तक के अंकों का जोड़ना-घटाना नहीं आता है।

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश में निपुण भारत अभियान मिशन अंकुर के माध्यम से विद्यार्थियों की निपुणता में सकारात्मक प्रगति हुई है। रिपोर्ट में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवता में किए जा रहे सुधारों का असर दिखा है। यह बात गुरुवार को स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने निपुण भारत अभियान मिशन अंकुर की कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर कही।

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उन्होंने कहा कि यह परिणाम स्कूल शिक्षा विभाग के हर स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत, लगन और परिश्रम का फल है। उन्होंने राज्य एवं जिलावार वार्षिक मूल्यांकन 2024 का रिपोर्ट कार्ड जारी किया। स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि नवंबर 2022 के मूल्यांकन के विगत रिपोर्ट कार्ड की तुलना में इस बार निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों की प्राप्ति में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।


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दावे से उलट हकीकत

हालांकि 2024 की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की स्थिति यह है कि दूसरी कक्षा तक के 66 प्रतिशत बच्चे क, ख, ग और ए, बी, सी, डी के अक्षर भी नहीं पहचान पाते हैं। इसी प्रकार 53 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो दो अंकों की संख्या भी नहीं पहचानते हैं। इसके बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग का दावा है कि वर्ष 2022 की अपेक्षा इस बार सरकारी स्कूलों में बच्चों के सीखने की क्षमता में सुधार हुआ है।

बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा निपुण भारत अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में मिशन अंकुर के नाम से इसे लागू किया गया है।

52 जिलों के 4500 स्कूलों में किया गया था सर्वे

अंकुर अभियान के तहत दूसरी और तीसरी कक्षा के बच्चों में सीखने की क्षमता का आकलन करने के लिए 52 जिलों के 322 विकासखंडों में सर्वे किया गया। इसमें सैंपल सर्वे के लिए 4500 स्कूलों को चयन किया गया था, जिसमें दूसरी कक्षा के 34 हजार और तीसरी कक्षा के 37 हजार बच्चों को शामिल किया गया था। इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, लेकिन 2022 में किए गए सर्वे को आधार मानें तो इन कक्षाओं में काफी सुधार भी हुआ है।

51 प्रतिशत बच्चों को दो अंकों में घटाना नहीं आता

इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले 51 प्रतिशत बच्चों को 20 तक की संख्या को घटना भी नहीं आता है। 25 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो दो अंकों की संख्या को जोड़ नहीं पाते हैं। वहीं दूसरी कक्षा के 58 प्रतिशत बच्चे तीन शब्दों का वाक्य नहीं पढ़ पाते हैं। 66 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनको क, ख, ग पढ़ने नहीं आता है। वहीं तीसरी कक्षा के 40 प्रतिशत ऐसे बच्चे मिले, जिनको 99 तक के अंकों का जोड़ना-घटाना नहीं आता है। तीसरी कक्षा के 52 प्रतिशत बच्चे क, ख, ग, घ नहीं लिख पाते हैं। 57 प्रतिशत बच्चे वाक्य नहीं लिख पाते और न ही इनको पढ़ने में सक्षम हैं।