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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 20, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

MP News: खरमोर के संरक्षण के लिए प्रजनन केंद्र बनाएगा वन विभाग, केंद्र सरकार की अनुमति के बाद शुरू होगा काम

MP News: खरमोर के संरक्षण के लिए मध्य प्रदेश के सैलाना और सरदारपुर में संरक्षण केंद्र बनाए जाएंगे। केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद इस पर काम शुरू ...और पढ़ें

By Dhananajay Pratap SinghEdited By: Bharat Mandhanya
Publish Date: Tue, 20 Feb 2024 02:16:07 PM (IST)Updated Date: Tue, 20 Feb 2024 02:16:07 PM (IST)
MP News: खरमोर के संरक्षण के लिए प्रजनन केंद्र बनाएगा वन विभाग, केंद्र सरकार की अनुमति के बाद शुरू होगा काम
मध्‍य प्रदेश में बनेंगे खारमोर संरक्षण केंद्र

HighLights

  1. मध्य प्रदेश में होगा खारमोर का संरक्षण
  2. सैलाना और सरदारपुर में बनेंगे संरक्षण केंद्र
  3. केंद्र सरकार से ली जाएगी अनुमति

MP News भोपाल, राज्य ब्यूरो। मध्य प्रदेश में खरमोर के संरक्षण के लिए वन विभाग प्रजनन केंद्र बनाएगा। मध्य प्रदेश के सैलाना और सरदारपुर में खरमोर पाए जाते हैं, लेकिन इनकी संख्या में लगातार कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में वन विभाग ने कैंपा फंड से इनके संरक्षण के लिए राशि भी मांगी है और खरमोर के लिए प्रजनन केंद्र बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है। इसके लिए भारत सरकार से अनुमति ली जाएगी। इसके बाद ही कार्य शुरू किया जाएगा।

गिद्धों को संरक्षित करने की तर्ज पर मध्य प्रदेश में खरमोर संरक्षण को भी संरक्षित किया जाएगा। यह प्रजाति मध्य प्रदेश के धार स्थित सरदारपुर और रतलाम के सैलाना में प्रजनन के लिए आती है और अंडे देकर उनमें से बच्चे निकलने तक यहां रूकती है। जब बच्चे उड़ने योग्य हो जाते हैं तो वे यहां से कश्मीर की वादियों में लौट जाते हैं, लेकिन लगातार घटती संख्या को देखते हुए अब मप्र का वन विभाग इन्हें संरक्षित करने का कार्य करेगा।


खरमोर की मूवमेंट जानने के लिए उनके किसी एक खरमोर के पैरों में ट्रैकिंग डिवाइस लगाई जाएगी और वे कहां से आते हैं और मध्य प्रदेश से फिर कहां लौट जाते हैं। इसका अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा सरदारपुर और सैलाना में खरमोर के अनुकूल वातावरण बनाने पर कार्य किया जा रहा है।

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कश्मीर की वादियों से आते हैं मप्र

खरमोर पक्षी कश्मीर की वादियों से प्रजनन के लिए मध्य प्रदेश के सैलाना आते हैं। वर्षाकाल में इस क्षेत्र की जलवायु इन्हें रास आती है। जुलाई के सुहाने मौसम में इनका आगमन शुरू होता है और अक्टूबर अंत तक ये बच्चों समेत उडककर पुन अपनी मूल बसाहट की ओर लौट जाते हैं। खरमोर एक बड़े आकार का लंबी टांगों वाला भारतीय पक्षी है।

विलुप्ति का संकट

एक शताब्दी पहले तक खरमोर पूरे भारत में हिमालय से लेकर दक्षिण तट पर पाए जाते थे। घास के मैदानों में ही पाए जाने वाले खरमोर की संख्या अब धीरे-धीरे कम होने लगी है। 1980 के बाद तो लगभग विलुप्त से होने लगे खरमोर पर पक्षी विशेषज्ञों व सरकार का ध्यान गया। 15 जुलाई 1983 को मध्य प्रदेश शासन ने अधिसूचना जारी कर सैलाना, आम्बा और शेरपुर क्षेत्र में कुल 1296.541 हेक्टेयर भूमि खरमोर पक्षी के प्रवास के लिए अभयारण्य क्षेत्र घोषित किया। सैलाना अंतर्गत 355.570 हेक्टेयर क्षेत्र शिकारवाड़ी के नाम से जाना जाता है। उधर, केंद्र सरकार के केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय ने खरमोर को संकटग्रस्त पक्षी घोषित किया है।