
भोपाल (राज्य ब्यूरो)। वन्यजीव द्वारा फसल की 25 प्रतिशत से कम क्षति भी होती है तो राज्य सरकार मुआवजा देगी। इसके लिए एकमुश्त राशि निर्धारित की जाएगी। 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए वन बल प्रमुख एके पाटिल ने सेवानिवृत्ति से पहले इसका प्रस्ताव बनाकर शासन में भेज दिया है। वन विभाग इस प्रस्ताव का परीक्षण कर मुख्यमंत्री सचिवालय भेजेगा। अगर इस पर सहमति बनती है तो फसल का 25 प्रतिशत से कम नुकसान होने पर मुआवजे से वंचित रहने वाले किसानों को क्षतिपूर्ति की राशि मिल सकेगी। अभी राजस्व विभाग द्वारा फसल क्षति का मूल्यांकन कर मुआवजे का निर्धारण किया जाता है और राजस्व विभाग 25 प्रतिशत से कम फसल क्षति होने पर इसे क्षति नहीं मानता है।
दरअसल, हर साल रोजड़ा (नीलगाय), जंगली सुअर, हिरण, हाथी सहित अन्य वन्यजीवों द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया जाता है। भोजन की तलाश में वन्यजीव गांव में प्रवेश करते हैं और फसल खाने के साथ ही खेत को भी बर्बाद करते हैं। फसल क्षति का आकलन पटवारी द्वारा किया जाता है, लेकिन 25 प्रतिशत कम क्षति होने पर मुआवजा नहीं दिया जाता है।
प्रदेश में हर साल औसत 65 लोगों की मौत बाघ, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा सहित अन्य वन्यप्राणियों के हमले में होती है। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के बाद अब वन्यप्राणी के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होने पर उसके परिजनों को आठ लाख रुपये की सहायता दी जाती है।