
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। ऐसे विद्यार्थी, जो अपात्र हैं और छात्रवृत्ति प्राप्त कर रहे हैं, उनका परीक्षण किया जाएगा। यह कार्य संस्थावार होगा। अनुसूचित जाति -जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रवृत्ति के पिछले वर्षों के लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी।
छात्रवृत्ति में आवेदन के सत्यापन, पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और छात्रवृत्ति वितरण की समय सीमा भी निर्धारित की जाएगी।
इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी, जिला लोक सेवा प्रबंधक और लीड बैंक मैनेजर समन्वय के लिए जिला स्तर पर अभियान चलाएंगे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में अनुसूचित जाति-जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति वितरण की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए।
कहा कि जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रकिया के सरलीकरण के लिए टास्क फोर्स बनाई जाए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि शिक्षा पोर्टल से छह विभागों की 20 प्रकार की छात्रवृत्ति की स्वीकृति देकर वितरण जाकर किया जा रहा है।
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वर्ष 2023-24 में 64 लाख विद्यार्थियों को लगभग 330 करोड़ की छात्रवृत्ति का वितरण किया गया है। वर्ष 2024-25 में अब तक 92 लाख नामांकन हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए। विद्यार्थियों को दस्तावेजों के सत्यापन में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। कोई भी प्रकरण लंबित नहीं रहना चाहिए।
इसके साथ ही सभी व्यवसायिक व प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुसूचित जाति जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थी उपलब्धियां अर्जित करें, इस उद्देश्य से प्रभावी कार्य योजना बनाई बनाई जाए।
बैगा, भारिया और सहरिया जनजाति के युवाओं की होमगार्ड तथा पुलिस में भर्ती को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
बैठक में उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री कृष्णा गौर, मुख्य सचिव वीरा राणा समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।