MP News: मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब कुलपति कुलगुरु कहे जाएंगे, इन पदों के नाम भी बदलेंगे
उस समय बैठक में डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित थे। कुलाधिपति और राज्यपाल डॉ. मंगुभाई पटेल से मिली सहमति के बाद मोहन यादव ने शिवराज सरकार में भी प्रस्ताव को स्वीकृत कराने के प्रयास किए थे, लेकिन सहमति नहीं बन सकी थी। अब मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव ने कैबिनेट में यह निर्णय लिया है।
By Paras Pandey
Edited By: Paras Pandey
Publish Date: Tue, 06 Feb 2024 08:07:20 PM (IST)
Updated Date: Tue, 06 Feb 2024 08:07:20 PM (IST)
मप्र में कुलपति अब कुलगुरु कहे जाएंगे भोपाल, (राज्य ब्यूरो)। मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों में कुलपति अब कुलगुरु कहे जाएंगे। सवा साल पुराने प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति दे दी है। यह प्रस्ताव दिसंबर 2022 में तैयार किया गया था, उस समय शिवराज सरकार में डॉ.मोहन यादव उच्च शिक्षा मंत्री थे।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने आठ दिसंबर 2022 को राजभवन के सांदीपनि सभागार में आयोजित विश्वविद्यालय समन्वय समिति की 100वीं बैठक में प्रदेश में विश्वविद्यालयों के कुलपति का पदनाम कुलगुरु किए जाने के निर्देश दिए थे।
उस समय बैठक में डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित थे। कुलाधिपति और राज्यपाल डॉ. मंगुभाई पटेल से मिली सहमति के बाद मोहन यादव ने शिवराज सरकार में भी प्रस्ताव को स्वीकृत कराने के प्रयास किए थे, लेकिन सहमति नहीं बन सकी थी। अब मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव ने कैबिनेट में यह निर्णय लिया है।
दरअसल, महिला कुलपति होने पर अकसर असहज स्थितियां बनती थीं और मजाक भी उड़ाया जाता था। भारतीय संस्कृति के अनुरूप गुरु को सम्मान देने के लिए यह परिवर्तन किया जा रहा है।
मंत्रिपरिषद द्वारा मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2024 के माध्यम से मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 में संशोधन करते हुए पंडित शंभुनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय शहडोल को अधिनियम के अंतर्गत लाने, कुलपति पदनाम को कुलगुरु किए जाने एवं सागर में नवीन रानी अवंति बाई लोधी विश्वविद्यालय की स्थापना किए जाने का निर्णय लिया गया।
विचारों की घर वापसी - उधर, भारतीय जन संचार संस्थान (आइआइएमसी) के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कुलपति पदनाम को कुलगुरु किए जाने के निर्णय को सार्थक बदलाव बताया है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में शब्द की सत्ता बहुत बड़ी है। शब्द ब्रह्म है।
हम जो बोलते हैं, वैसा ही बनते और अपेक्षा करते हैं। जो बदलाव इन दिनों शिक्षा और समाज में हो रहे हैं, उसे मैं 'विचारों की घर वापसी ' मानता हूं। इससे कुलपति का पद गौरवान्वित होगा। विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के केंद्र बनेंगे। भारत का भारत से परिचय होगा।