
MP News: भोपाल, राज्य ब्यूरो। मध्य प्रदेश में डेढ़ साल बाद भी इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने वर्ष 2022 में प्रदेश के तीन बढ़े शहरों में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखा था। यह कार्य दिसंबर 2022 तक पूरा करना था, लेकिन अब तक इन शहरों में चार्जिंग स्टेशन नहीं लग सकें हैं। हालांकि सरकार का दावा है कि इंदौर में दो चार्जिंग स्टेशन लगे हैं।
इंदौर-भोपाल के बीच इलेक्ट्रिक बसें शुरू हो गई हैं। बस संचालक सरकार के समक्ष चार्जिंग स्टेशन बनाने का सुझाव भी प्रस्तुत कर चुके हैं, लेकिन इस ओर सरकार की कोई रुचि देखने को नहीं मिल रही है। बता दें कि फेस-एक के तहत इंदौर में 40 इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। 80 अतिरिक्त इंटरसिटी इलेक्ट्रिक बसें चलाया जाना प्रस्तावित है।
फेस-दो में भोपाल, इंदौर एवं जबलपुर में चार्जिंग अधोसंरचना विकास कार्य किया जाना है। इन शहरों में 217 चार्जिंग स्टेशन (81 स्लो और 130 फास्ट चार्जिंग स्टेशन) स्थापित करने का प्रस्ताव है। इधर, मध्य प्रदेश सरकार, भारत सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन को लेकर जारी की गई नई गाइड लाइन का अध्ययन भी करा रही है। इसके अनुसार ही प्रदेश की नई इलेक्ट्रिक वाहन और चार्जिंग स्टेशन की नीति तैयार की जाएगी।
मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए निजी निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार एसओपी (स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर) बना रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नई गाइड लाइन भी जारी की जाएगी। वर्तमान में ईवी पालिसी तो है लेकिन गाइड लाइन न होने से इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन में कठिनाई होती है। एप्को ने दिल्ली की वसुधा फाउंडेशन से अनुबंध किया है। जो गाइड लाइन बनाने में मदद करेगी।
ईवी के संचालन के लिए इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2019 में संशोधन कर इसे पुन: लागू किया जाएगा। राज्य सरकार ने ईवी नीति को नए स्वरूप में बनाने की कवायद शुरू कर दी है। जल्द ही विशेषज्ञों के साथ एक बैठक भी आयोजित की जा रही है। इसमें शासकीय विभाग, ईवी की भारतीय और विदेशी निर्माण कंपनियां, चार्जिंग स्टेशन सहित अंधोसंरचना बनाने वाली कंपनियां, एक्सपर्ट्स आदि शामिल हैं। इसके अलावा वाहन डिलर, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों जैसे अन्य व्यवसायियों और खास तौर पर रशियन कंपनियों को भी बुलाया जाएगा। इसके साथ बैठक कर नई नीति के लिए सुझाव लिए जाएंगे। इन सुझावों के आधार पर नीति का प्रारूप तय किया जाएगा।