MP News: भोपाल (राज्य ब्यूरो)। जल विद्युत परियोजना से पैदा की जाने वाली सस्ती बिजली से भी बिजली कंपनियां परहेज कर रही हैं। यही वजह है कि कई जल विद्युत इकाइयों से बिजली उत्पादन ठप पड़ा हुआ है। टोंस हाइडल प्रोजेक्ट की 105 मेगावाट की तीन नंबर इकाई फिर बंद हो गई है। यह 750 दिन बंद रहने के बाद 13 जुलाई को ही शुरू की गई थी। यह इकाई प्रतिदिन 25 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन कर सकती है लेकिन बांध भरे होने के बाद भी दो वर्ष से उत्पादन नहीं हो रहा है। मात्र 25 पैसे प्रति यूनिट खर्च पर इससे बिजली उत्पादन होता है। एक अनुमान के अनुसार इकाई खराब होने से अब तक लगभग पांच सौ करोड़ रुपये का विद्युत उत्पादन में नुकसान हुआ है। इसी संयंत्र की 105 मेगावाट वाली दो नंबर इकाई पांच जनवरी 2022 से बंद है।

टोंस हाइडल प्रोजेक्ट (जल विद्युत परियोजना) सिरमौर की 105 मेगावाट की यूनिट नंबर तीन में 17 जून 2020 को जेनरेटर स्टेटर जल गया था। जो दो वर्ष एक महीने में बनकर 13 जुलाई 2022 को पुन: शुरू हुआ। इस तरह इकाई से लगभग 25 महीने बिजली उम्पादन नहीं हो सका। इकाई शुरू होने के मात्र 25 दिन बाद ही रविवार को सुबह को फिर जनरेटर स्टेटर जल गया है, जो घटिया निर्माण और देखरेख का जीता जागता प्रमाण है। जब बांधों में भरपूर पानी है तो कोयले की तुलना में काफी सस्ती बिजली का उत्पादन किया जा सकता है, लेकिन बिजली कंपनियों के कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार की बदौलत उत्पादन नहीं हो रहा है। मप्र पावर जनरेशन कंपनी (जेनको) के इतिहास में सिंगाजी कोल संयंत्र की तीन नंबर 660 मेगावाट यूनिट साल भर से ज्यादा समय से खराब पड़ी है।

गांधी सागर और पेंच की इकाई भी बंद : गांधी सागर जल विद्युत केंद्र की यूनिट 115 मेगावाट की इकाई 14 सितंबर 2019 से पानी भर जाने के कारण खराब हो हो गई थी ,जो आज तक बंद है। पेंच हाइडल पावर स्टेशन में 80 मेगावाट की दो इकाई लगी हैं। यहां एक नंबर इकाई 20 जुलाई 2022 से 22 सितंबर 2022 तक के लिए एनुअल ओवरहालिंग के नाम पर बंद की गई है।

इस वर्ष बरसात अच्छी हुई है। बांध भी भरे हैं। यह बात सही है कि जल विद्युत का उत्पादन कोयले की तुलना में सस्ता पड़ता है। प्रदेश में कुछ इकाई क्यों खराब हुई हैं, इसका परीक्षण कराएंगे। - प्रद्युम्न सिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री मध्य प्रदेश

Posted By: Prashant Pandey

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