
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय उपचुनाव के दौरान लोकतंत्र के दो अलग-अलग रूप देखने को मिले। एक ओर जहां आगर-मालवा के सुसनेर में ईवीएम बदलने को लेकर भारी राजनीतिक ड्रामा और तीखी बहस हुई, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर रायसेन और खरगोन जिलों में ग्रामीणों ने 'सड़क नहीं तो वोट नहीं' के नारे के साथ मतदान का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया।
प्रदेश के कुल 103 पदों के लिए मंगलवार को वोट डाले गए, जिनके परिणाम 3 और 5 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।
आगर-मालवा जिले के सुसनेर में नगर परिषद अध्यक्ष पद के उपचुनाव के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब वार्ड-7 के पोलिंग बूथ पर करीब 15 मिनट तक मतदान रुक गया। कांग्रेस के स्थानीय विधायक भैरों सिंह परिहार ने प्रशासनिक अधिकारियों पर बिना पूर्व सूचना के ईवीएम बदलने और फर्जी वोटिंग कराने का गंभीर आरोप लगाया।
विधायक के पास मौजूद सूची और बूथ में रखी ईवीएम के सीरियल नंबर में भिन्नता मिलने पर दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। इसी बीच, विधायक भैरोंसिंह परिहार ने पुलिस अधिकारियों के फोन के जरिए तहसीलदार भंवर सिंह चौहान को कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, "क्या तुम्हारे बाप का राज है यहाँ?"
वहीं, वार्ड 10 के बूथ संख्या 12 पर भाजपा नेताओं (जिलाध्यक्ष ओम मालवीय व नगर पालिका अध्यक्ष निलेश पटेल) ने बीएलओ ललिता सेन पर आरोप लगाया कि बुरका पहनकर आ रही महिला मतदाताओं का चेहरा देखे बिना फर्जी वोट डलवाए जा रहे हैं। हालांकि, बीएलओ ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए प्रक्रिया को नियमानुसार बताया।
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पंच, सरपंच और जनपद पंचायत सदस्यों के वोटों की गिनती 3 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से विकासखंड मुख्यालयों पर होगी और नतीजे उसी दिन घोषित होंगे। जबकि जिला पंचायत सदस्य और पंच पदों के अंतिम आधिकारिक परिणाम 5 अक्टूबर को जारी किए जाएंगे।