
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में दुष्कर्म के मामले दर्ज करने में लगाई जा रही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। कुछ मामलों में ऐसी धाराएं लगाई जाती हैं, जो गैरजरूरी होती हैं तो कुछ में जरूरी धाराएं भी नहीं लगाई जाती हैं।
उदाहरण के तौर पर पिछले माह का भोपाल के ही एक थाने का प्रकरण लें तो पता चलता है कि पुलिस ने दुष्कर्म की धारा तो लगा दी, लेकिन महिला की शिकायत के बाद भी मारपीट की धारा नहीं लगाई। इसी प्रकार पोक्सो प्रकरणों में पीड़िता की आयु के अनुसार बीएनएस की अलग-अलग धाराएं नहीं लगाई जा रही हैं।
पुलिस मुख्यालय द्वारा एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में तीन कर्मचारियों की टीम बनाई गई है जो प्रतिदिन दर्ज किए गए मामलों में लगाई गई धाराओं की समीक्षा करती है। समीक्षा के दौरान ये कमियां सामने आई हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में हर दिन 15 से 20 मामले दर्ज किए जाते हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) अनिल कुमार ने बताया कि विवेचना के दौरान ही सुधार कराया जा रहा है, जिससे कोर्ट में अभियोजन का पक्ष कमजोर नहीं रहे। इससे पुलिसकर्मी अभ्यस्त भी हो रहे हैं।
जिस तरह की गलतियां सामने आ रही हैं उनका उल्लेख करते हुए समय-समय पर इंदौर-भोपाल के पुलिस आयुक्त और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखा जा रहा है। 15 जुलाई को भी एक पत्र भेजा गया था। बड़ी बात यह कि जो गलती पुलिस मुख्यालय अब पकड़ रहा है उन्हें इसके पहले जिलों में किसी अधिकारी ने नहीं देखी।
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