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MP में दुष्कर्म के 10 से 15 प्रतिशत मामलों में सही धाराएं नहीं लगा रही पुलिस, BNS की समीक्षा में खुली पोल

प्रदेश में दुष्कर्म के मामले दर्ज करने में लगाई जा रही BNS की धाराओं में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। कुछ मामलों में ऐसी धाराएं लगी हैं, जो गैरजरूरी...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 28 Jul 2026 06:18:17 PM (IST)Updated Date: Tue, 28 Jul 2026 06:18:17 PM (IST)
MP में दुष्कर्म के 10 से 15 प्रतिशत मामलों में सही धाराएं नहीं लगा रही पुलिस, BNS की समीक्षा में खुली पोल
MP में दुष्कर्म के 10 से 15 प्रतिशत मामलों में सही धाराएं नहीं लगा रही पुलिस

HighLights

  1. दुष्कर्म मामलों में धाराओं के चयन में सामने आई पुलिस की लापरवाही
  2. PHQ की समीक्षा में उजागर हुईं बीएनएस और पोक्सो की गलत धाराएं
  3. कमियों को सुधारने के लिए एसपी और पुलिस कमिश्नरों को लिखा गया पत्र

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में दुष्कर्म के मामले दर्ज करने में लगाई जा रही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। कुछ मामलों में ऐसी धाराएं लगाई जाती हैं, जो गैरजरूरी होती हैं तो कुछ में जरूरी धाराएं भी नहीं लगाई जाती हैं।

उदाहरण के तौर पर पिछले माह का भोपाल के ही एक थाने का प्रकरण लें तो पता चलता है कि पुलिस ने दुष्कर्म की धारा तो लगा दी, लेकिन महिला की शिकायत के बाद भी मारपीट की धारा नहीं लगाई। इसी प्रकार पोक्सो प्रकरणों में पीड़िता की आयु के अनुसार बीएनएस की अलग-अलग धाराएं नहीं लगाई जा रही हैं।


पुलिस मुख्यालय में बनी समीक्षा टीम, रोजाना दर्ज केसों की जांच

पुलिस मुख्यालय द्वारा एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में तीन कर्मचारियों की टीम बनाई गई है जो प्रतिदिन दर्ज किए गए मामलों में लगाई गई धाराओं की समीक्षा करती है। समीक्षा के दौरान ये कमियां सामने आई हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में हर दिन 15 से 20 मामले दर्ज किए जाते हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) अनिल कुमार ने बताया कि विवेचना के दौरान ही सुधार कराया जा रहा है, जिससे कोर्ट में अभियोजन का पक्ष कमजोर नहीं रहे। इससे पुलिसकर्मी अभ्यस्त भी हो रहे हैं।

जिस तरह की गलतियां सामने आ रही हैं उनका उल्लेख करते हुए समय-समय पर इंदौर-भोपाल के पुलिस आयुक्त और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखा जा रहा है। 15 जुलाई को भी एक पत्र भेजा गया था। बड़ी बात यह कि जो गलती पुलिस मुख्यालय अब पकड़ रहा है उन्हें इसके पहले जिलों में किसी अधिकारी ने नहीं देखी।

इस तरह की गलतियां आईं सामने

  • पोक्सो के मामलों में पीड़िता की आयु 16 वर्ष से कम होने पर बीएनएस की धारा 65 (1) और 12 से कम होने पर 65(2) लगाई जानी चाहिए, पर इसका ठीक से पालन नहीं हो रहा है।
  • बीएनएस में शादी का झांसा या झूठा वादा कर दुष्कर्म में धारा 69 लगाई जाती है, पर पुलिस कुछ केस में इसके साथ ही दुष्कर्म की धारा (64) जो आइपीसी में धारा 376 थी, लगा रही है।
  • मानसिक विक्षिप्त पीड़िता के प्रकरण में आमतौर पर दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा 92(घ) का समावेश नहीं किया जा रहा है।
  • नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद उसके गर्भवती होने की स्थिति में पोक्सो एक्ट धारा 5(जे-ii) का समावेश नहीं किया जा रहा है।

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