राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल : गत एक जुलाई से नए स्वरूप में प्रभावी तीन नए कानूनों में साक्ष्य संकलन के लिए केंद्र की ओर से बनाए गए ई-साक्ष्य एप के विकल्प के तौर पर मप्र पुलिस ने 'पिस्टल' (पुलिस इन्वेस्टिगेशन साक्ष्य ट्रांसमिशन ऑनलाइन) बनाया है। यह ओपन सोर्स एप्लीकेशन पर बना है।
इस पिस्टल एप में खास बात यह है कि इसमें एक से दो घंटे तक वीडियो भी बनाकर विशेष कोडिंग और प्रोग्रामिंग के जरिए थाने के सर्वर में सुरक्षित भेजा जा सकता है, जबकि ई-साक्ष्य में एक बार में चार मिनट से अधिक का वीडियो ही बन पा रहा है। दूसरा, ई-साक्ष्य में बनाए गए वीडियो डिजी लाकर में रखे जाते हैं, पर एक वीडियो 10 एमबी से अधिक होने पर सेव नहीं हो सकता। इस कारण मध्य प्रदेश सहित सभी राज्यों को दिक्कत आ रही है।
राज्यों ने चार मिनट की अवधि को बढ़ाने का सुझाव भी केंद्रीय गृह मंत्रालय को दिया है। पिस्टल प्रोजेक्ट को लेकर नवाचार करने वाले छिंदवाड़ा रेंज के डीआइजी सचिन अतुलकर ने बताया कि लगभग एक माह से जबलपुर जोन के छह जिलों के एक-एक नोडल थानों में इसे प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया है। पिस्टल को लेकर 15 पुलिस अधीक्षकों के साथ वर्चुअल बैठक भी हो चुकी है, जिसमें सभी ने इसकी प्रशंसा की है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में ई-साक्ष्य और 'पिस्टल' दोनों का उपयोग हो सकता है। जिन मामलों में छोटा वीडियो बनाना है, वहां ई-साक्ष्य और शराब की जब्ती सहित बड़े वीडियो की आवश्यकता होने पर पिस्टल का उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के लिए भी यह उपयोगी हो सकता है। राज्यों को हम अपनी तकनीक बता देंगे।
ई-साक्ष्य एप उपयोग करने वाला मध्य प्रदेश पहला राज्य है, पर कई जिलों में अभी यह पूरी तरह से प्रारंभ ही नहीं हो पाया है। कारण, इसके लिए सभी विवेचक दक्ष नहीं है। दूसरा सभी का लागिन-पासवर्ड नहीं बन पाया है। बाकी जगह ई-साक्ष्य और प्रयोग के रूप में कुछ जगह पिस्टल प्रारंभ किया गया है। नए कानूनों में यह कहीं लिखा नहीं है कि ई-साक्ष्य का ही उपयोग करना है।
ई-साक्ष्य में चार मिनट से अधिक के वीडियो नहीं बनने के कारण घटना स्थल, बयान आदि के एक से अधिक वीडियो बनाना पड़ता है। टुकड़े-टुकड़े वीडियो होने पर साक्ष्य प्रस्तुत करने के दौरान पुलिस के लिए न्यायालय में यह साबित करना कठिन हो सकता है कि वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। इसे साबित करने के लिए वीडियो की हैस वैल्यू (लंबा कोड) मापदंड के अनुसार होनी चाहिए। एक बार में बनाए गए वीडियो में यह वैल्यू प्रभावित नहीं होती।
अभी जबलपुर में कुछ जगह पिस्टल को प्रयोग के तौर पर शुरू किया है। ई-साक्ष्य भी चल रहा है। दोनों व्यवस्थाओं का विश्लेषण करने के बाद निर्णय लेंगे किस तकनीक का कहां कैसे उपयोग करना है।
पवन श्रीवास्तव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआईडी)