
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में सेफ सिटी अभियान के तहत सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की निगरानी के लिए अब चरणबद्ध तरीके से एआई आधारित कैमरे लगाने की तैयारी है। पहले चरण में 10 शहरों में करीब 25 हजार एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इस पर लगभग 600 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
पुलिस मुख्यालय जल्द ही इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजेगा। पूरी योजना के तहत आगे चलकर प्रदेश में सवा लाख कैमरे लगाए जाने हैं। जिन 10 शहरों में कैमरे लगाए जाने हैं, उनमें स्मार्ट सिटी वाले शहर इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और सतना भी सम्मिलित हैं।
इस योजना में कैमरों की संख्या बढ़ाने के साथ निगरानी की तकनीक को भी उन्नत किया जाएगा। एआई आधारित कैमरे संदिग्ध परिस्थितियों और तय मानकों वाली गतिविधियों की पहचान कर संबंधित कंट्रोल रूम को अलर्ट कर सकेंगे। इससे पुलिस को घटना की जानकारी मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई में मदद मिलेगी। कैमरों से मिलने वाले फुटेज का उपयोग अपराध की रोकथाम के साथ घटना के बाद जांच में भी किया जा सकेगा।
जुलाई में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की समीक्षा बैठक में सेफ सिटी कार्यक्रम के तहत प्रदेश में एक लाख कैमरे लगाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी। उस समय यह भी सामने आया था कि सेफ सिटी सहित कई प्रस्ताव बजट के अभाव में अटके हुए हैं। अब इस योजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी है।
नई व्यवस्था में केवल नए कैमरे ही नहीं लगाए जाएंगे, बल्कि पुलिस के मौजूदा कैमरा नेटवर्क को भी एकीकृत किया जाएगा। थानों में लगे कैमरों और डायल 112 वाहनों में उपलब्ध कैमरों को भी केंद्रीय कंट्रोल रूम से जोड़ने की तैयारी है। इससे अलग-अलग स्थानों से मिलने वाली लाइव फुटेज और रिकॉर्डिंग को एकीकृत निगरानी व्यवस्था में लाया जा सकेगा।
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इन कैमरों में ऐसे फीचर भी रहेंगे, जो जोखिम वाली परिस्थितियों को पहचान लेंगे। उदाहरण के तौर पर सूनसान सड़क पर अकेली महिला जा रही है तो अलर्ट मिल जाएगा। यातायात की निगरानी, भीड़ प्रबंधन, अपराधियों की पहचान में भी उनकी उपयोगिता रहेगी।