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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 31, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जंगल में आग पर काबू पाने की मप्र का SOP Model अब देशभर में होगा लागू, नासा की सहायता से एक घंटे में घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं उपाय

मध्य प्रदेश की फारेस्ट फायर कंट्रोल एसओपी को केंद्रीय सरकार ने सराहा है और इसी आधार पर नई एसओपी बनाई जा रही है। जन सहभागिता और नासा सेटेलाइट की मदद से...और पढ़ें

By Sourabh SoniEdited By: Neeraj Pandey
Publish Date: Wed, 31 Jul 2024 04:42:00 AM (IST)Updated Date: Thu, 01 Aug 2024 02:19:03 AM (IST)
जंगल में आग पर काबू पाने की मप्र का SOP Model अब देशभर में होगा लागू, नासा की सहायता से एक घंटे में घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं उपाय
नासा से मिले चित्रों की सहायता से घटनास्थल पर होता है एक्शन।

HighLights

  1. आग नियंत्रण के मध्य प्रदेश माडल को भारत सरकार ने सराहा
  2. एक घंटे से भी कम समय में घटनास्थल पर किए जाते हैं उपाय
  3. उत्तराखंड सहित देशभर में एसओपी को लागू करने की योजना

सौरभ सोनी, नईदुनिया, भोपाल : मध्य प्रदेश की फारेस्ट फायर कंट्रोल एसओपी (जंगल में आग पर काबू पाने की मानक संचालन प्रक्रिया) की केंद्र सरकार ने सराहना की है। इसी आधार पर अब नए सिरे से भारत सरकार की ऐसी ही एसओपी बनाई जा रही है। इसमें जंगल की आग बुझाने के लिए किए गए प्रयास, अग्नि पोर्टल में जन सहभागिता से आग की सूचना और उस पर नियंत्रण सहित वन अमले की पेट्रोलिंग के प्रयास शामिल हैं।

आग की घटनाओं को रोकने के लिए सर्वाधिक कारगर जन सहभागिता सिद्ध हुई है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अब उत्तराखंड में भी यही प्रयोग करने की बात की जा रही है। पिछले दिनों केंद्रीय वन एवं पर्यावरण सचिव ने राज्यों की बैठक में मध्य प्रदेश की एसओपी को देशभर में लागू करने की बात भी कही गई थी।


आग की घटनाओं को रोकने के लिए नासा के सेटेलाइट की भी मदद ली जाती है। नासा के एक्वा और टेरा उपग्रहों पर लगे मोडिस सेंसर द्वारा वन में अग्नि स्थानों के बारे में पता लगाया जाता है। एक घंटे से भी कम समय में घटनास्थल पर आग नियंत्रण के किए उपाय जाते हैं।

जंगल में आग लगने के कारण

बता दें, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथारिटी (एनडीएमए) और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओइएफसीसी) भारत सरकार ने मई 2023 में मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के जंगल में लगी आग के कारण पर अध्ययन करवाया था। यह पाया गया कि जंगल में आग प्राकृतिक और मानव जनित दोनों कारणों से लगती है।

जंगल की आग आपदा

भारत सरकार ने उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में जंगल की आग को आपदा माना था। इन घटनाओं को रोकने बेहतर प्रबंधन किया गया। इसका परिणाम यह रहा कि मध्य प्रदेश में वर्ष 2021 में जहां 19,660 हेक्टेयर जंगल आग से प्रभावित हुआ था तो वर्ष 2023 में केवल 4496.11 हेक्टेयर वन क्षेत्र में ही आग लगी। इस वर्ष महज 1190 हेक्टेयर वन क्षेत्र में आग लगी।

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जन सहभागिता के लिए पोर्टल पर एक लाख लोग पंजीकृत

वन अग्नि पोर्टल पर एक लाख से अधिक लोगों ने पंजीयन किया है। ये लोग जंगल की आग की सूचना मिलने पर तत्काल नजदीकी वन अमले को सूचित करते हैं। साथ ही आग बुझाने में भी सहयोग करते हैं।

वहीं वन विभाग द्वारा वन क्षेत्र से लगे गांवों के ग्रामीणों को जंगल की आग से होने वाले नुकसान के बारे में बताकर इसके प्रति जागरूक किया जाता है। इसके चलते अब ग्रामीण सचेत रहते हैं और वन अमले के साथ मिलकर आग पर नियंत्रण के उपाय करते हैं।

यह प्रयोग बैतूल जिले और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में कारगर साबित हुआ है। यह दो वन क्षेत्र ऐसे हैं जहां आग की घटनाएं सर्वाधित होती रही हैं। लेकिन वर्ष 2023 से इस जुलाई तक आग की घटनाओं में 75 प्रतिशत तक कमी आई है।

ऐसे किया नियंत्रण

ग्रामीणों द्वारा खेतों में आग लगाई जाती है तो वन अमला इसकी निगरानी करता है। आग लगने वाले संभावित वन क्षेत्रों में वन अमला तैनात किया जाता है। वन अमले के मोबाइल फोन पर वन अग्नि नियंत्रण के लिए बनाया गया एप डाउनलोड कराकर सेटेलाइट इमेज की मदद से शीघ्र आग लगने वाले स्थल पर पहुंचा जाता है।

जन सहभागिता से मप्र में जंगल की आग की घटनाओं में 75 प्रतिशत तक कमी आई है। भारत सरकार ने हमारे इस प्रयास को सराहा है।

- दिलीप कुमार, पीसीसीएफ प्रोटेक्शन वन विभाग, मध्य प्रदेश