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MP में शिक्षकों की तबादला नीति, 10वीं बोर्ड में शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले शिक्षकों को मिलेगी पहली प्राथमिकता

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026 की शिक्षक स्थानांतरण नीति जारी कर दी है। इस बार जुलाई तक तबादला प्रक्रिया चलेगी। अगले साल से ग्रीष्मावकाश ...और पढ़ें

By Anjali raiEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 09 Jun 2026 08:16:53 PM (IST)Updated Date: Tue, 09 Jun 2026 08:16:53 PM (IST)
MP में शिक्षकों की तबादला नीति, 10वीं बोर्ड में शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले शिक्षकों को मिलेगी पहली प्राथमिकता
MP में शिक्षकों की तबादला नीति (ये तस्वीर एआई से बनाई गई है)

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026 की शिक्षक स्थानांतरण नीति जारी कर दी है। इस बार जुलाई तक तबादला प्रक्रिया चलेगी। अगले साल से ग्रीष्मावकाश में ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। नई नीति के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं बोर्ड परीक्षा में शत-प्रतिशत परिणाम देने वाले विद्यालयों के प्राचार्यों और शिक्षकों को स्वैच्छिक स्थानांतरण में पहली प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे शिक्षक अपनी पसंद के स्थान पर तबादला कराने के लिए प्राथमिक दावेदारी प्रस्तुत कर सकेंगे।

विभाग की प्रशासकीय एवं स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया 15 जुलाई तक संचालित होगी। विभाग ने इस बार स्थानांतरण प्रक्रिया को परिणाम प्रदर्शन और डिजिटल उपस्थिति से जोड़ते हुए कई महत्वपूर्ण प्रविधान किए हैं। इसके तहत हमारे शिक्षक एप के माध्यम से नियमित ई-अटेंडेंस दर्ज करने वाले शिक्षकों को भी स्वैच्छिक स्थानांतरण में विशेष प्राथमिकता मिलेगी।


शैक्षणिक सत्र 2025-26 में जनवरी से मार्च तक नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज करने वाले शिक्षक स्वैच्छिक स्थानांतरण के पात्र होंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगामी वर्षों में पूरे शैक्षणिक सत्र की ई-अटेंडेंस के आधार पर पात्रता तय की जाएगी। अभी तक नेटवर्क का बहाना बनाकर शिक्षक ई-अटेंडेंस से बचते रहे हैं।

तीन वर्ष बाद ही मिलेगा दोबारा स्वैच्छिक तबादले का अवसर

नई नीति के अनुसार तीन वर्ष पूर्व स्वैच्छिक स्थानांतरण प्राप्त कर चुके शिक्षक सामान्य परिस्थितियों में पुनः तबादले के पात्र नहीं होंगे। केवल विशेष या विषम परिस्थितियों में ही उनके आवेदन पर विचार किया जाएगा। वहीं मॉडल स्कूल, उत्कृष्ट विद्यालय और सांदीपनि विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी भी विद्यालय में शिक्षकों की कमी न हो।

स्वैच्छिक स्थानांतरण के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि कोई स्कूल शिक्षक-विहीन न हो जाए। पारस्परिक स्थानांतरण की सुविधा भी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी, लेकिन इसके लिए दोनों शिक्षकों का समान पद, विषय, संवर्ग और कैडर में होना अनिवार्य होगा।

पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों और विशेष श्रेणियों को मिलेगी वरीयता

राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को स्वैच्छिक स्थानांतरण में सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा वरिष्ठता के आधार पर महिला और पुरुष शिक्षकों को वरीयता मिलेगी।

मृतक कर्मचारी के आश्रितों, अतिशेष शिक्षकों, गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों अथवा उनके परिवारजनों, पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थापना चाहने वाले शिक्षकों, दिव्यांग शिक्षकों, विधवा, परित्यक्ता महिला और विधुर शिक्षकों को भी प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है।

ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता पर शिक्षक संगठन ने जताई आपत्ति

स्थानांतरण नीति में ई-अटेंडेंस को पात्रता का आधार बनाए जाने पर शासकीय शिक्षक संगठन ने आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि प्रदेश के कई विद्यालय दूरस्थ और नेटवर्क-विहीन क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां तकनीकी कारणों से नियमित ई-अटेंडेंस दर्ज करना संभव नहीं हो पाता। उनका कहना है कि अनेक शिक्षक विद्यालय में नियमित उपस्थिति के बावजूद तकनीकी खामियों के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर सके, इसलिए स्थानांतरण पात्रता को केवल ई-अटेंडेंस से जोड़ना उचित नहीं है।

अब अगले साल से ग्रीष्मावकाश में ही तबादले की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। स्वैच्छिक तबादला के लिए ई-अटेंडेंस को अनिवार्य किया गया है। - अभिषेक सिंह, आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय