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मध्य प्रदेश के इन 8 गांवों के नाम सुनकर लोटपोट हो जाएंगे आप! लंगोटी, चोली, साली, भैंसा... सब यहीं है

मध्य प्रदेश में कई गांव के ऐसे नाम है जिसे बताने में उस गांव के लोगों को शर्म आती है। आलम यह है कि इस गांव की लड़कियों की जब शादी होती है तो वह अपना प...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 31 Aug 2026 03:41:35 PM (IST)Updated Date: Mon, 31 Aug 2026 05:01:07 PM (IST)
मध्य प्रदेश के इन 8 गांवों के नाम सुनकर लोटपोट हो जाएंगे आप! लंगोटी, चोली, साली, भैंसा... सब यहीं है
मध्य प्रदेश के इन 8 गांवों के नाम सुनकर लोटपोट हो जाएंगे आप!

HighLights

  1. मध्य प्रदेश के कई गांवों के नाम सुनकर छूट जाती है हंसी
  2. 'लंगोटी', 'चोली' और 'भैंसा' जैसे नाम बताने में झिझकते हैं लोग
  3. नामों को बदलने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे ग्रामीण

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में अक्सर ऐसे दिलचस्प किस्से देखने को मिलते हैं जो चेहरे पर मुस्कान ले आते हैं, तो कभी ग्रामीणों के लिए संकोच का सबब बन जाते हैं। प्रदेश में कई ऐसे गांव मौजूद हैं, जिनके अजीबोगरीब नाम सुनकर पहली बार में कोई भी अपनी हंसी नहीं रोक पाता, तो वहीं इन गांवों में रहने वाले लोग अक्सर दूसरों के सामने अपने गांव का नाम बताने में झिझक और शर्म महसूस करते हैं।

आइए मध्य प्रदेश के ऐसे ही 8 प्रमुख गांवों के दिलचस्प और अनोखे किस्सों पर नजर डालते हैं...

1. लंगोटी गांव (खंडवा)

खंडवा जिले में स्थित 'लंगोटी' गांव अपने नाम को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहता है। स्थानीय निवासी जब किसी रिश्तेदारी या बाहर के शहर में जाते हैं, तो गांव का नाम बताने पर लोग अक्सर हंस पड़ते हैं, जिससे ग्रामीणों को काफी असहजता का सामना करना पड़ता है।


2. चोली गांव (खरगोन)

खरगोन जिले का 'चोली' गांव मध्य प्रदेश के सबसे अजीबोगरीब नाम वाले गांवों में शुमार है। इस गांव का नाम सुनते ही लोग चकित रह जाते हैं। नाम की वजह से होने वाली हिचकिचाहट के कारण ग्रामीण कई वर्षों से शासकीय दस्तावेजों में इस नाम को बदलने की मांग भी करते आ रहे हैं।

3. भैंसा गांव (सागर)

सागर जिले के पास बसा 'भैंसा' गांव अपने नाम की वजह से क्षेत्र में काफी चर्चित है। यहां के ग्रामीण बताते हैं कि जब भी वे किसी बैंक, सरकारी दफ्तर या नए परिचितों के सामने अपने गांव का नाम लेते हैं, तो सामने वाला खिलखिलाकर हंस देता है। इसी झिझक के कारण ग्रामीण अपने गांव का नाम लेने से पहले कई बार सोचते हैं।

4. मुर्गा गांव (सागर)

सागर जिले के ही गढ़ाकोटा क्षेत्र के पास स्थित 'मुर्गा' गांव की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। इस गांव में मुर्गी पालन के व्यवसाय की बहुलता के कारण इसका नाम 'मुर्गा' पड़ा। लगभग 500 लोगों की आबादी वाले इस गांव का नाम सुनकर बाहरी लोग अक्सर ठहाके लगाने लगते हैं।

5. लोडांपुरा गांव (मुरैना)

मुरैना जिले की कैलारस तहसील में स्थित 'लोडांपुरा' गांव अपने नाम के कारण काफी विवादों और चर्चा में रहा है। गांव का नाम बोलने में खुद यहां के निवासी भी संकोच करते हैं और कई बार नाम बदलने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गुहार लगा चुके हैं।

6. चऊमऊ / चौमू गांव (छिंदवाड़ा)

छिंदवाड़ा जिले का 'चऊमऊ' (चौमू) गांव लगभग 1000 से अधिक की आबादी वाला गांव है। इसका उच्चारण और अनोखा नाम सुनकर आसपास के इलाकों के लोग काफी मनोरंजन महसूस करते हैं, जबकि गांव के युवाओं को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल या पते में यह नाम लिखने में थोड़ी झिझक होती है।

7. छपरा गांव (सागर)

सागर जिले के रहली ब्लॉक के गढ़ाकोटा मार्ग पर बसा 'छपरा' गांव भी अपने नाम के कारण काफी जाना जाता है। हालांकि बिहार के छपरा शहर की तर्ज पर इसका नाम जरूर लगता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर पुराने समय में मिट्टी और खप्पर के बने कच्चे घरों (छप्पर) की अधिकता के कारण इसका नाम छपरा पड़ा था।

8. माफीपुरा गांव

मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ अंचल में स्थित 'माफीपुरा' गांव का नाम सुनकर लोग अक्सर हैरान रह जाते हैं। किसी गलती या माफी की भावना से जोड़कर देखे जाने वाले इस नाम को सुनकर हर नया व्यक्ति एक पल के लिए रुककर इसकी वजह जरूर पूछता है।

नाम बदलने की उठती रही है मांग

इन गांवों में रहने वाली नई पीढ़ी और युवा अक्सर बताते हैं कि कॉलेज, नौकरी या वैवाहिक संबंधों के दौरान जब उनसे स्थायी पते के बारे में पूछा जाता है, तो गांव का नाम बताते ही माहौल हल्का और हास्यपद हो जाता है। यही कारण है कि इनमें से कई गांवों के निवासी समय-समय पर पंचायत और जिला प्रशासन से अपने गांवों का नाम बदलकर कोई नया और सम्मानजनक नाम रखने का अनुरोध करते रहे हैं।