
MPPSC 2019 Result: भोपाल। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग ने एमपीएससी- 2019 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है। इस एग्जाम में लड़कियों ने बाजी मारी है। परीक्षा में भोपाल के भी कई प्रतिभागियों ने सफलता हासिल की है।पंचशील नगर की रुचि जैन ने डीएसपी (उप पुलिस अधीक्षक)के पद पर टाप किया है। वहीं निहारिका मीना का चयन असिस्टेंट डायरेक्टर जनसंपर्क के पद पर हुआ है तो भोपाल में पढ़ी सैफा हासमी भी डीएसपी बनीं हैं। खास बात यह है कि रुचि ने एमपीपीएससी की परीक्षा 2019 में दी थी। इसके बाद यूपीएसई-2020 में शामिल हुईं। जिसे पास करने के बाद अभी अंडमान निकोबार में आइएएस की ट्रेनिंग पर हैं। उल्लेखनीय है कि विवादों के चलते एमपीपीएससी- 2019 का परिणाम आने में काफी देरी हुई है।
पीएससी का रिजल्ट आने से पहले यूपीएसई में चयन
रुचि जैन सरकारी स्कूल और कालेज में पढ़ी हैं। उनके पिता अरविंद जैन व्यापारी हैं, जबकि मां सरिता जैन गृहिणी हैं। रुचि ने बताया की कामयाबी में मां-पिता और बड़े भाई का महत्वपूर्ण रोल रहा है।भाई आयुष ने मोटिवेटर का रोल निभाया। रुचि ने बताया कि स्कूलिंग के बाद मास्टर आफ आर्ट और फिर दो बार एमए किया। वर्ष 2016 में बीए की पढ़ाई पूरी कर ली थी। इसके बाद एसबी (स्पेशल ब्रांच) की परीक्षा दी, जिसमें आल इंडिया पहली रैंक मिली थी। 2016 से 2022 तक स्पेशल ब्रांच में रही। इस बीच यूपीएसई-2020 में शामिल हुईं। हिंदी माध्यम से एग्जाम दिया और पहले प्रयास में ही सेकेंड रैंक मिली थी।जिसमें अंडमान निकोबार कैडर मिला। यहां पर अभी एसडीएम के पद के लिए ट्रेनिंग ले रही हूं। एमपीपीएससी का रिजल्ट आने के बाद स्थितियां बदली हैं। आराम से सोचकर निर्णय लूंगी कि मुझे कौन सी सेवा में रहना चाहिए। रुचि ने बताया कि मैं मध्यम वर्गीय परिवार से हैं।परिवार की पिछली सात पुश्तों में कोई भी सदस्य सरकारी सेवा में नहीं रहा है। वे पहली सरकारी अधिकारी हैं। इस पर गर्व होता है।मैंने आनलाइन तरीके से एग्जाम के बारे में जाना और सेल्फ स्टडी की। हिंदी माध्यम से होने की वजह से कई चुनौतियां भी आईं।
अब यूपीएससी की तैयारी करेंगी निहारिका
असिस्टेंट डायरेक्टर जनसंपर्क के पद पर चयनित हुईं कोलार रोड निवासी निहारिका मीना किसान अजय मीना की बेटी हैं। स्कूलिंग भोपाल में प्राइवेट स्कूल में हुई। इसके बाद राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई वर्ष 2018 में पूरी की।इंजीनियरिंग करने के साथ एमपीपीएससी की तैयारी शुरू की थी। पहले एक साल कोचिंग की फिर सेल्फ स्टडी से परीक्षा की तैयारी की और पहले ही प्रयास में चयन हो गया। नवदुनिया से चर्चा में निहारिका ने बताया कि चयन की मुझे और पूरे परिवार को खुशी है, लेकिन अभी मैं पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हूं और यूपीएससी की तैयारी करूंगी। परीक्षा और परिणाम को लेकर विवाद और कोरोना के कारण तीन साल बर्बाद हुए हैं, इसकी भरपाई करना मुश्किल है। कई अभ्यर्थी इस बीच ओवर एज हो गए हैं। हालांकि मेरे पास अभी तैयारी के लिए काफी समय है।
भोपाल में पढ़ीं सैफा हासमी भी डीएसपी बनीं
भोपाल में पढ़ीं सैफा हासमी भी डीएसपी बनींभोपाल में पढ़ी सैफा हासमी भी डीएसपी बन गई हैं। अभी वह भोपाल में सामाजिक न्याय विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर हैं। मूलत: छतरपुर जिले के नौगांव की रहने वाली सैफा की पढ़ाई भोपाल में ही हुई है। उन्हें आठवीं रैंक मिली है। सैफा ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा छतरपुर जिले में ही हुई है। भोपाल से उन्होंने इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन ब्रांच से इंजीनियरिंग की। मास्टर आफ सोशल वर्क किया है। साइकिलिंग और बच्चों को पढ़ाने का शौक है। नवदुनिया से चर्चा में सैफा ने बताया ने उनका पेपर अच्छा गया था कि इसलिए अच्छे रिजल्ट की उम्मीद थी। पापा शिक्षक और मम्मी गृहणी हैं। पुलिस में सेवा के माध्यम से अपराध पीड़ित महिलाओं का न्याय दिलाने की कोशिश करूंगी।
लेबर आफीसर बने आशीष, तैयारी जारी रहेगी
कैची छोला की श्रीरामनगर कालोनी में रहने वाले आशीष चौरसिया के चयन लेबर आफीसर के पद पर हुआ है।एमपीएससी- 2019 में उनका यह पहला प्रयास था।आशीष ने बताया कि महर्षि सेंटर फार एक्सीलेंस लांबाखेड़ा से स्कूलिंग करने के बाद एक निजी कालेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग वर्ष 2018 में पूरी की थी। इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष से पीएसएसी की कोचिंग आरंभ कर दी थी। मैंने टेक्निकल से प्रशासनिक क्षेत्र चुना था और इस निर्णय में परिवार को पूरा सपोर्ट रहा। अभी मैं लेबर आफीसर के पद पर ज्वाइन करूंगा,लेकिन तैयारी जारी रहेगी। मैं पीएससी 2023 के प्रीलिम्स में भी बैठा था और आगे साक्षात्कार में भी हिस्सा लूंगा। पापा महेंद्र कुमार चौरसिया रेलवे पुलिस में हेड कांस्टेबल और मम्मी राजकुमारी गृहणी हैं। आशीष ने बताया कि रिश्तेदारी में गमी होने की वजह से रिजल्ट की खुशी नहीं मनाई है।
रिजल्ट आते ही किया मम्मी को फोन

रजत पुनिया (बांये) ने एक होटल में अपने दोस्त के साथ सफलता की खुशी मनाई।
एमपीपीएससी के माध्यम से अधीनस्थ लेखा अधिकारी के रूप में चयनित हुए रजत पुनिया आष्टा के पास कन्नोद मिर्जि गांव के एक किसान परिवार से संबंध रखते हैैं। रजत बताते हैैं कि गांव में अक्सर प्रशासनिक व्यवस्थाओं में कमी देखता था। इससे ही प्रभावित होकर कालेज के द्वितीय वर्ष से पीएससी की तैयारी शुरु की थी। 2019 में मेरा ग्रेजुएशन पूरा हुआ और इसी वर्ष पहला अटेंप्ट भी दिया। हालांकि चार वर्ष का इंतजार काफी लंबा रहा, लेकिन जैसे ही मैैंने सूची में अपना नाम देखा तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा और अपनी मम्मी को पहला काल किया। मैैंने इस वर्ष भी एमपीपीएससी की परीक्षा दी थी और अब मेंस भी दूंगा। फिलहाल मेरा प्रयास है कि डिप्टी कलेक्टर पोस्ट तक पहुंच सकूं और आगे यूपीएससी के लिए प्रयास करूंगा।