राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल : सरकारी बसें आरंभ करने के प्रयास में अब सरकार एक कदम और आगे तो बढ़ी है लेकिन यह तय हो गया कि कानूनी दिक्कतों के कारण मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (सपनि) बंद ही रहेगा। इसके विकल्प के तौर पर अब यह तय किया गया है कि नगर निगमों के साथ एक कंपनी बनाकर सरकारी बसों का संचालन आरंभ किया जाए। फिलहाल सरकार की जितनी एजेंसियां बस संचालन कर रही हैं, उन्हें मर्ज किया जाएगा।
बिजली कंपनियों की तरह ही परिवहन सेवा उपलब्ध करवाने का खाका तैयार किया जा रहा है। आइएएस मनीष सिंह को सरकार ने यह जिम्मेदारी दी है। सपनि को पुन: प्रारंभ न करने के पीछे वजह यह है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में यह शपथ पत्र दे चुकी है कि इस निगम को किसी भी सूरत में दोबारा आरंभ नहीं किया जाएगा।
प्रदेश में लोक परिवहन सेवा को नए स्वरूप में प्रारंभ करने की तैयारी है। नगर निगमों के साथ राज्य सरकार की एक संयुक्त कंपनी बनाकर पूर्व के सड़क परिवहन निगम की तरह सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ाया जाएगा। कंपनी को राज्य सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जा सकता है।
अभी अलग-अलग सरकारी एजेंसियों द्वारा संचालित लोक परिवहन सेवाओं का नियंत्रण इस कंपनी को देने पर विचार चल रहा है। परिवहन विभाग यह परीक्षण कर रहा है कि लोगों के सुगम यातायात के लिए सार्वजनिक परिवहन का कौन सा मॉडल उचित हो सकता है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने लोक परिवहन को मजबूत करने के लिए सार्वजनिक परिवहन सेवा प्रारंभ करने की घोषणा की है।
वर्ष 2005 में बाबूलाल गौर के मुख्यमंत्रित्व वाली तत्कालीन राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को बंद कर दिया था। इसके बाद से ही प्रदेश स्तरीय सार्वजनिक परिवहन सेवा से लेकर गांव तक लोक परिवहन की कोई व्यवस्था नहीं है। स्थानीय स्तर पर नगरीय निकायों द्वारा कंपनी बनाकर कुछ बसों का संचालन किया जाता है।
नगर निगमों के साथ कंपनी बनाकर उस क्षेत्र में आने वाली सभी नगरपालिका और नगर परिषद तक परिवहन सेवाएं आरंभ की जा सकती हैं। इसका लाभ यह होगा कि सैकड़ों गांव तक बसों की सुविधा प्राप्त हो जाएगी। इन उन सारी एजेंसियों को मर्ज कर दिया जाएगा, जो स्थानीय निकाय में बसों का संचालन कर रही हैं। ऐसी ग्रामीण परिवहन सेवा, बीसीसीएल सहित मप्र पर्यटन विकास निगम सहित सरकार के नियंत्रण वाली अन्य कंपनियों को एक कंपनी की परिधि में लाया जाएगा।