
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में ऑटो रिक्शा चलाने वाले हितग्राहियों की आय बढ़ाने और शहर को प्रदूषण मुक्त रखने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री ई-रिक्शा योजना बजट के अभाव में अटक गई है। पिछले वर्ष नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मुख्यमंत्री ई-रिक्शा योजना लागू करने का निर्णय लिया था।
योजना के अंतर्गत पहले चरण में 3500 हितग्राहियों को लाभ देने का लक्ष्य है। योजना में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से ब्याज में सब्सिडी भी दी जानी है, लेकिन अब तक योजना के लिए बजट प्रविधान ही नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि सरकार ने अपने संकल्प-पत्र 2023 में आटो एवं टैक्सी चालक कल्याण के लिए प्रविधान रखने का वादा किया था।
योजना का निरंतर वर्ष 2027-28 तक क्रियान्वयन किया जाना था। योजना के अंतर्गत हितग्राही को नवीन ई-रिक्शा क्रय करने के साथ पुराने डीजल एवं पेट्रोल रिक्शा को पुनः सुसज्जित (रेट्रो फिटिंग) कर ई-रिक्शा में परिवर्तित किया जाकर फायदा पहुंचाने की तैयारी थी। चयनित हितग्राहियों को दीनदयाल जन-आजीविका मिशन-शहरी घटक में चार लाख रुपये तक ब्याज मुक्त व्यक्तिगत ऋण प्रदान करने का प्रविधान किया गया था।
इसी के साथ हितग्राही को प्राप्त ऋण पर आठ प्रतिशत का ब्याज अनुदान केंद्र सरकार द्वारा डीबीटी के माध्यम से खाते में प्रदान किया जाना था। मुख्यमंत्री ई-रिक्शा योजना में लिए गए ऋण पर पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान की राशि राज्य सरकार द्वारा वहन की जाती। हितग्राही को कोलेटरल सिक्योरिटी मुक्त ऋण प्रदान करने का प्रविधान था। योजना के अंतर्गत शहरी गरीब महिलाओं को विशेष रूप में लाभ देने का प्रविधान किया गया।
हितग्राही का नगरीय क्षेत्र में निवास करना आवश्यक रखा गया। योजना का लाभ 18 से 55 वर्ष तक के हितग्राही को मिलता, जो पूर्व से आटो रिक्शा संचालित कर रहा हो। चयनित हितग्राही के पास मोटर व्हीकल लाइसेंस होना आवश्यक रखा गया। हितग्राही को आवेदन-पत्र निःशुल्क प्राप्त होंगे। बजट की स्वीकृति मिलते ही योजना को गति मिलने की उम्मीद है, जिससे हजारों परिवारों को संबल मिलेगा।
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