राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल । रक्त चढ़ाने से होने वाले संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए मध्य प्रदेश के पांच बड़े शासकीय मेडिकल कॉलेजों में अब नैट (न्यूक्लिक एसिड टेस्ट) की सुविधा शुरू की जा रही है।
इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में लगाई जा रही नैट मशीनें रक्त में हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और एचआईवी वायरस की मौजूदगी का संक्रमण के शुरुआती चरण में ही पता लगा सकेंगी। अक्टूबर के अंत तक पांचों स्थानों पर यह सुविधा शुरू करने की तैयारी है।
15 दिन में पता चलेगी रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नैट से चार से 15 दिन में संक्रमण की पहचान संभव होगी। अभी रक्त की जांच मुख्य रूप से एलाइजा जैसी सीरोलॉजिकल जांच से होती है, जिसमें शरीर में संक्रमण के बाद बनने वाली एंटीबॉडी की पहचान की जाती है।
संक्रमण के बाद एंटीबाडी बनने में 3 से 6 माह तक लगते हैं। इस दौरान व्यक्ति के संक्रमित होने के बावजूद जांच में संक्रमण की पुष्टि नहीं हो पाती। इसे ही विंडो पीरियड कहा जाता है।
इस अवधि में ब्लड बैंक से लिया गया यह रक्त जिसे चढ़ाया जाता है वह भी संक्रमित हो जाता है। नैट जांच वायरस के आनुवंशिक पदार्थ की पहचान करती है, इसलिए संक्रमण का पता अपेक्षाकृत पहले चल जाता है।
नैट जांच के बाद ही चढ़ाया जाएगा रक्त
नई व्यवस्था के तहत रक्तदान से एकत्र किए गए रक्त की नैट जांच अनिवार्य रूप से होगी। जांच में संक्रमण नहीं पाए जाने के बाद ही रोगियों को चढ़ाने के लिए जारी किया जाएगा।
दूसरे जिलों के ब्लड बैंकों से लाया गया रक्त भी संबंधित मेडिकल कॉलेज में नैट जांच से गुजरेगा, यानी बिना नैट जांच के रक्त रोगी को नहीं दिया जाएगा।
सतना जिला अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की घटना के बाद सरकार यह सुविधा शुरू करने जा रहा है।
बता दें कि प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 8 लाख यूनिट ब्लड स्वैच्छिक रक्तदान से मिलता है।
62 सरकारी ब्लड बैंकों का रक्त पांच केंद्रों पर जांचा जाएगा
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने नैट जांच के लिए एक निजी कंपनी को ठेका दिया है। शासन कंपनी को प्रति यूनिट जांच के लिए 950 रुपये का भुगतान करेगा। पांचों मेडिकल कॉलेजों में लगने वाली मशीनों के माध्यम से मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और अन्य शासकीय संस्थानों को मिलाकर 62 शासकीय ब्लड बैंकों से आने वाले रक्त की जांच की जाएगी।
नैट जांच की प्रक्रिया के दौरान मरीजों को रक्त की तत्काल जरूरत होने पर समस्या न आए, इसके लिए ब्लड बैंकों में अतिरिक्त स्टाक रखने की व्यवस्था की जाएगी।