
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने मेडिकल शिक्षा के 2023 वाले नियमों को खत्म कर दिया है। इसका सीधा असर मध्य प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों पर भी पड़ेगा। यह फैसला देशभर में भी लागू हो गया है। प्रदेश में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, रतलाम, खंडवा, शहडोल, विदिशा, दतिया सहित सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज अब इसी व्यवस्था के दायरे में आएंगे।
नियम खत्म होने के बाद भी प्रदेश के हर कॉलेज को हर साल अपनी सालाना रिपोर्ट (एडीआर) एनएमसी को देनी होगी। इसमें कितने शिक्षक हैं, कितनी सीटें हैं, अस्पताल में कितने बेड और मरीज हैं, क्या सुविधाएं हैं, सब बताना होगा। जानकारी छिपाने पर कार्रवाई हो सकती है। मध्य प्रदेश के जिन कॉलेजों को पहले मान्यता, सीटों की अनुमति या नवीनीकरण मिल चुका है, वह बना रहेगा।
छात्रों की पढ़ाई, डिग्री और इंटर्नशिप पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। मध्य प्रदेश के किसी कॉलेज का आवेदन, अपील, जांच या मान्यता का मामला अगर पहले से लंबित है, तो वह पुराने नियम के हिसाब से ही पूरा होगा। अब से कोई भी नया आवेदन, नई सीट, नया कोर्स या नया कॉलेज एनएमसी अधिनियम 2019 के हिसाब से देखा जाएगा।
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