Navrarti 2021: नवरात्र में नृत्य नाटिका के जरिए मां जगदंबा की आराधना, बघेली भक्तिगीतों ने भी मोहा मन
जनजातीय संग्रहालय मे सिद्धा महोत्सव के दूसरे दिन बघेली भक्तिगायन और कथक शैली में 'दुर्गा' नृत्य नाटिका की मनभावन प्रस्तुतियां हुईं।
By Ravindra Soni
Edited By: Ravindra Soni
Publish Date: Sat, 09 Oct 2021 04:31:48 PM (IST)
Updated Date: Sat, 09 Oct 2021 04:31:48 PM (IST)

भोपाल (नवदुनिया रिपोर्टर)। मप्र जनजातीय संग्रहालय में सिद्धा समारोह के दूसरे दिन शुक्रवार शाम शीला त्रिपाठी और साथियों द्वारा बघेली भक्ति गायन एवं बड़वाह के संजय महाजन और साथियों द्वारा गणगौर एवं कथक शैली में नृत्य नाटिका दुर्गा की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत शीला त्रिपाठी ने बघेली भक्ति गायन से की। कलाकारों ने ऊंचे पहड़िया बसी मोरी मइया..., मइया बिनती करूं कर जोर..., माई नौ दिन करें श्रृंगार मइया धीरे-धीरे अइयो...एवं मोरे अंगना मइया मोरे अंगना, जगदंबा भवानी आईं मोरे अंगना...जैसे भक्तिगीतों को पेश करते हुए समां बांध दिया। उनके साथ मंच पर हारमोनियम पर मांगीलाल ठाकुर, की-बोर्ड पर प्रसन्ना राव, तबले पर अभय ठाकुर, ढोलक पर मोहित ठाकुर एवं मंजीरा पर अनुराग शर्मा ने संगत की।
दूसरी प्रस्तुति बड़वाह के संजय महाजन और साथियों द्वारा गणगौर एवं कथक शैली में नृत्य नाटिका दुर्गा की दी गई। इस प्रस्तुति के माध्यम से बताया गया कि दुर्गा का निरूपण सिंह पर सवार एक देवी के रूप में किया जाता है। उन्होंने शुंभ-निशुंभ, मधु- कैटभ आदि कई राक्षसों का वध किया। महिषासुर नामक असुर का वध करने के कारण महिषासुरमर्दिनी नाम से विख्यात हुईं। माता का दुर्गा देवी नाम दुर्गम नाम के महान दैत्य का वध करने के
कारण पड़ा। माता ने शताक्षी स्वरूप धारण किया और उसके बाद शाकंभरी देवी के नाम से विख्यात हुईं। शाकंभरी देवी ने ही दुर्गमासुर का वध किया। जिसके कारण वे समस्त ब्रह्मांड में दुर्गा देवी के नाम से भी पूज्य हो गईं। पुराण में दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है। दुर्गा असल में शिव की पत्नी आदिशक्ति का एक रूप हैं, शिव की उस पराशक्ति को प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकाररहित बताया गया है। मार्कंडेय पुराण में ब्रहदेव ने मनुष्य जाति की रक्षा के लिए एक परम गुप्त, परम उपयोगी और मनुष्य का कल्याणकारी देवी कवच एवं देवी सुक्त बताया है। भगवत पुराण के अनुसार मां जगदंबा का अवतरण श्रेष्ठ पुरुषों की रक्षा के लिए हुआ है। जबकि श्रीमद देवीभागवत के अनुसार वेदों और पुराणों की रक्षा और दुष्टों के दलन के लिए त्रि देवों ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के दिव्य तेजों से मां जगदंबा का अवतरण हुआ है। कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए कलाप्रेमियों ने प्रस्तुति का आनंद लिया।