
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। आयुर्वेद कालेजों की शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर करने के लिए भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआइएसएम) ने वर्तमान शैक्षणिक सत्र (2026-27) से मान्यता के नियम और कड़े कर दिए हैं। इसमें एक फैकल्टी कम होने पर स्नातक पाठ्यक्रम की पांच प्रतिशत सीटें कम कर दी जाएंगी। यानी यदि किसी कालेज में 60 सीटें हैं तो तीन घटाकर 57 कर दी जाएंगी। इससे शिक्षा की गुणवत्ता भी बनी रहेगी।
अभी तक निर्धारित मापदंड पूरा नहीं करने पर मान्यता नहीं दी जाती। इससे विद्यार्थी और कालेज दोनों का नुकसान होता है।
दूसरी बड़ी कसावट यह कि फैकल्टी की निर्धारित न्यूनतम संख्या में 10 प्रतिशत की छूट भी इसी शैक्षणिक सत्र से समाप्त कर दी गई है। यह निर्णय हाल ही में हुई एनसीआइएसएम बोर्ड की 160 वीं बैठक में लिया गया है। आयोग ने इसके निर्देश जारी कर दिए हैं।
नए मापदंडों के लागू होने से मध्य प्रदेश सहित देशभर में आयुर्वेद कालेजों की सीटों की संख्या कम हो सकती है। प्रदेश में सात शासकीय आयुर्वेद कालेज हैं, इनमें भोपाल के पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कालेज को छोड़ दें तो सभी कालेजों में शिक्षकों की कमी है।
डुप्लीकेट फैकल्टी मिलने की स्थिति में यदि वह कालेज पर एक वर्ष से कार्यरत दिखाया जाता है तो प्रति फैकल्टी प्रतिवर्ष 25 लाख रुपये अर्थदंड लगेगा। टीचर को एक वर्ष के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। यदि शिक्षक लगातार तीन वर्षों तक इस तरह से काम करते हुए पाया जाता है तो उसका टीचर कोड स्थायी रूप से निरस्त कर दिया जाएगा।
नए नियम में अस्पताल में मापदंड निर्धारित शर्तों के अनुसार नहीं मिलने पर सीटों में तीस फीसदी तक कटौती की जा सकती है।
एनसीआइएसएम का यह बहुत अच्छा कदम है। इससे गुणवत्ता में सुधार होगा। हालांकि, मप्र सहित देशभर के आयुष कालेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में कुछ साल तक मापदंडों में 10 से 20 फीसदी का छूट देने पर विचार किया जाना चाहिए। - डॉ. राकेश पांडेय, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आयुष मेडिकल एसोसिएशन