-दशहरे पर हिंदू समुदाय में दर्शन करने की है मान्यता, रावण वध से पहले श्रीराम ने किए थे इसके दर्शन अबरार खान। भोपाल

नवदुनिया

यूं तो जिसका नीला कंठ हो? वह नीलकंठ कहलाता है, लेकिन पक्षियों में नीलकंठ को लेकर धार्मिक मान्यताएं भी है। खासकर, दशहरे के मौके पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन को शुभ माना जाता है। हिंदू इसी मान्यता के चलते बरसों से नीलकंठ के दर्शन करते चले आ रहे है, लेकिन जिस पक्षी को हम नीलकंठ मानकर दर्शन करते है, वह सही नीलकंठ नहीं है। पक्षी विज्ञान के मुताबिक सही नीलकंठ पक्षी यूरोपीय देशों और हिमालय की तराईयों में प्रवास कर भारत आता है। महत्वपूर्ण यह है कि ब्लू जे यूरेशियन रोलर (नीलकंठ) नामक यह खूबसूरत पक्षी राजधानी भोपाल के केरवा, रातापानी और होशंगाबाद हाईवे के जंगलों में इन दिनों आ चुका है। यदि आप इस दशहरे पर नीलकंठ के दर्शन करने का प्लान बना रहे है, तो निकल पड़िए इन स्थानों पर सही नीलकंठ के दर्शन करने।

-रंग और आकार में थोड़ा अंतर

भारतीय नीलकंठ पक्षी (इंडियन रोलर) से इस प्रवासी नीलकंठ का रंग और आकार थोड़ा अलग है, लेकिन दोनों की उड़ान और भोजन एक जैसा है। यह संकटग्रस्त पक्षियों की श्रेणी में है। यह पक्षी किसानों का मित्र है, लेकिन फसलों में दवाओं के छिड़काव से प्रभावित होने वाले कीट पतंगे खाकर ये नस्ल समाप्ति की ओर जा रही है।

-यूरेशियन रोलर ही नीलकंठ

वन विहार के रिटायर्ड सहायक संचालक डॉ.सुदेश वाघमारे बताते है कि यूरेशियन रोलर (कश्मीरी नीलकंठ) ही सही नीलकंठ है। वास्तव में जिसका कंठ नीला होता है, वह कश्मीरी नीलकंठ (यूरेशियन रोलर ) है। यह शीत ऋतु में भारत के अन्य राज्यों में भी देखा सकता है। दरअसल, यह वही नीलकंठ है, जिसे भगवान शिव का प्रतिनिधि माना गया।

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