
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल के चौराहों और रोड जंक्शनों पर लगे हाई-वॉल्यूम पब्लिक अनाउंसमेंट (पीए) सिस्टम से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है।
पर्यावरण कार्यकर्ता राशिद नूर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित सीमा से अधिक शोर करने वाले सभी पीए सिस्टम को तत्काल बंद, डिस्कनेक्ट या प्रतिबंधित किया जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने दलील दी कि स्मार्ट सिटी और ट्रैफिक पुलिस द्वारा लगाए गए लाउडस्पीकर दिनभर तेज आवाज में चलते हैं, जिससे आवासीय क्षेत्रों, अस्पतालों, अदालतों और शैक्षणिक संस्थानों सहित साइलेंस जोन प्रभावित हो रहे हैं।
एनजीटी ने माना कि लगातार तेज ध्वनि से लोगों में तनाव, चिड़चिड़ापन और सुनने की क्षमता कमजोर होने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
अधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर नागरिक को शांतिपूर्ण और प्रदूषण-मुक्त वातावरण में जीने का अधिकार है।
एनजीटी ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं कि वह शहर के प्रभावित चौराहों पर ध्वनि स्तर का अध्ययन करे और पीए सिस्टम संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करे।
इसमें ध्वनि की अधिकतम सीमा और संचालन का समय निर्धारित किया जाएगा।
भोपाल कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी आदेशों के प्रभावी पालन के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को होगी।