
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि सरकार के पास इसका कोई अपडेट रिकॉर्ड ही नहीं है। हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में अवैध कॉलोनियों को लेकर सवाल उठे, तब भी अधिकारी संख्या नहीं बता पाए। अधिकारियों के एक अनुमान के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में 2,500 से अधिक अवैध कॉलोनियां हैं। यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
हालांकि, राज्य सरकार अब अवैध कॉलोनियों को लेकर सख्त नियम बनाने जा रही है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग नया कानून तैयार कर रहा है, जिसमें अवैध कॉलोनी बनाने वाले कॉलोनाइजरों पर जुर्माना और सजा कई गुना बढ़ाने की तैयारी है।
7,981 अवैध कॉलोनियों की पहचान
वर्ष 2016 में नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश में 7,981 अवैध कॉलोनियों की पहचान की थी। इनमें से 3,155 कॉलोनियां केवल प्रदेश के 16 नगर निगम क्षेत्रों में चिह्नित की गई थीं। उस समय ग्वालियर नगर निगम में सबसे अधिक 696 अवैध कॉलोनियां दर्ज की गईं। उसके बाद इंदौर नगर निगम था, जहां 636 कॉलोनियां चिह्नित हुई थीं। इसके अलावा खंडवा में 338, भोपाल में 320 और जबलपुर में 224 अवैध कॉलोनियां सामने आई थीं।
हालांकि, तत्कालीन शिवराज सरकार ने वर्ष 2022 तक की अवैध कॉलोनियों को वैध करने का निर्णय लिया था। इसमें कॉलोनियां वैध तो हुईं, लेकिन वर्ष 2022 के बाद से अब तक प्रदेश में ढाई हजार से अधिक नई कॉलोनियां बन गईं।
स्थिति सामान्य जमीन पर अवैध कॉलोनियों तक सीमित नहीं है। ग्रीन बेल्ट, तालाबों के किनारे, शासकीय भूमि और सरकारी योजनाओं के लिए आवंटित जमीन पर भी बड़ी संख्या में अनधिकृत कॉलोनियां बनाई गई हैं। वर्ष 2016 में प्रदेश के 16 नगर निगमों में ऐसी 806 अपात्र अनधिकृत कॉलोनियां चिह्नित की गई थीं।
निकायों की लापरवाही और बढ़ता ग्राफ
बाद के वर्षों में विभाग ने नगरीय निकायों से बार-बार जानकारी मांगी, लेकिन अधिकांश निकायों ने अद्यतन आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए। कुछ गैर-सरकारी अनुमानों के अनुसार, प्रदेश में अब अवैध कॉलोनियों की संख्या 30 हजार से अधिक हो सकती है। अकेले भोपाल जिले में ही वर्तमान में 600 से अधिक अवैध कॉलोनियां बताई जा रही हैं। वर्ष 2016 में भोपाल में इनकी संख्या 320 थी, जिनमें से कुछ कॉलोनियों को बाद में वैध भी किया गया। इसके बावजूद नई अवैध बसाहटें लगातार विकसित होती रहीं।
नगर निगम सीमा से सटे ग्रामीण क्षेत्रों के खेतों में काटी जा रही कॉलोनियां
नगर निगम व निकायों की सीमा से सटे गांवों के खेतों में अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं। ये न टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) से स्वीकृत होती हैं और न ही निगम या निकायों से कॉलोनी विकास की अनुमति ली जाती है। कम कीमत पर प्लॉट काटकर बेच दिए जाते हैं। अवैध कॉलोनियों की सबसे बड़ी संख्या निगम सीमा से सटे इन ग्रामीण क्षेत्रों में ही मिलती है।
नए कानून में 10 साल की जेल, एक करोड़ रुपये तक के अर्थदंड का प्रविधान प्रस्तावित
प्रदेश में अवैध कॉलोनी काटने वालों पर शिकंजा कसने के लिए नया एक्ट लाने की तैयारी की जा रही है, जिसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इस नए कानून में अवैध कॉलोनी विकसित करने पर 10 साल की सजा और एक करोड़ रुपये तक के अर्थदंड का प्रविधान प्रस्तावित है। साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई का प्रविधान किया गया है। इस बारे में एसीएस संजय दुबे से बातचीत का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने अवैध कॉलोनियों की जानकारी देने में रुचि नहीं दिखाई।