MP नर्सिंग स्टाफ अब घर बैठे कर सकेंगे उच्च शिक्षा के लिए आवेदन; 5 साल की सेवा वाले ही होंगे पात्र, जानें नियम
नए नियमों के अनुससार चयनित कर्मचारियों को पढ़ाई पूरी करने के बाद पांच साल तक सरकारी सेवा में काम करना होगा और पांच लाख रुपये का बॉन्ड भरना होगा।
Publish Date: Fri, 16 Oct 2026 08:46:29 AM (IST)Updated Date: Fri, 16 Oct 2026 08:46:29 AM (IST)
प्रतीकात्मकHighLights
- नर्सिंग स्टाफ की आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है
- मप्र में यह व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी
- पढ़ाई के बाद पांच साल सरकारी सेवा का बॉन्ड भरना जरूरी
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल । अब सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में काम करने वाली नर्सों को उच्च शिक्षा और छुट्टी के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है।
नए आदेश के अनुसार नर्सिंग स्टाफ अब एएनएम, जीएनएम, पोस्ट बेसिक बीएससी और एमएससी नर्सिंग जैसे कोर्स के लिए सीधे पोर्टल पर आवेदन कर सकेंगे।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 से यह व्यवस्था लागू होगी। आवेदन के लिए कर्मचारी का रिकॉर्ड ई-एचआरएमएस पर दर्ज होना और मोबाइल नंबर लिंक होना जरूरी है, क्योंकि ओटीपी उसी नंबर पर आएगा।
यह आदेश संचालक लोक स्वास्थ्य एवं सेवाएं मनोज पुष्प ने जारी किए हैं।
ये पात्रता होगी जरूरी
इसमें पांच साल की सरकारी सेवा पूरी करने वाले और प्रोबेशन पीरियड पूरा कर चुके नियमित स्टाफ ही पात्र होंगे। पोस्ट बेसिक बीएससी और एमएससी के लिए मप्र नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल का वैध पंजीयन जरूरी है। निजी नर्सिंग कॉलेज में प्रवेश के लिए नियमित कर्मचारी पात्र नहीं होंगे।
पूरे सेवाकाल में सिर्फ एक बार ही अध्ययन अवकाश मिलेगा। जितनी छुट्टी खाते में होगी उतनी स्वीकृत होगी, बाकी अवधि अवैतनिक रहेगी।
पढ़ाई के बाद सरकारी सेवा में काम करना जरूरी
इसमें पढ़ाई के बाद पांच साल तक सरकारी सेवा में काम करना होगा, जिसके लिए 5 लाख रुपये का बॉन्ड मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से भरना होगा। यह पूरी दो चरणों में प्रक्रिया होगी। पहले चरण में जिले के सीएमएचओ 13 से 22 अक्टूबर तक दस्तावेजों की जांच कर पात्र आवेदनों को राज्य स्तर पर भेजेंगे।
दूसरे चरण में 13 से 23 अक्टूबर तक भोपाल स्तर पर जांच के बाद अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया जाएगा। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि 28 अक्टूबर 2026 तक सभी पात्र कर्मचारियों को कार्यस्थल से रिलीव किया जाए, ताकि वे समय पर पढ़ाई शुरू कर सकें।
इससे पहले यह व्यवस्था ऑफलाइन थी, जिसमें कर्मचारियों को काफी भटकना पड़ता था।