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भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट पर फिर लगा ब्रेक: जमीन खाली कराने में नाकाम अफसर, 2028 की डेडलाइन पर बढ़ी चिंता

एम्स-करोंद मेट्रो कॉरिडोर में करीब 40 आरा मशीनों की शिफ्टिंग अब तक पूरी नहीं हो सकी है। मेट्रो प्रशासन इसके लिए 5.50 करोड़ रुपये जारी कर चुका है।

By Madanmohan malviyaEdited By: bhupendra Singh Rajput
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 08:13:50 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 08:13:50 PM (IST)
भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट पर फिर लगा ब्रेक: जमीन खाली कराने में नाकाम अफसर,  2028 की डेडलाइन पर बढ़ी चिंता
भोपाल में बड़ा बाग की जमीन और आरा मशीनों को हटाने का विवाद जारी है। फाइल फोटो।

HighLights

  1. प्रोजेक्ट के लिए जमीन खाली कराने में देरी बनी चुनौती
  2. न आरा मशीनें हट पाईं, न बड़ा बाग का जमीन विवाद सुलझा
  3. मेट्रो की राह में अड़ंगे बरकरार, प्रशासन की बैठकें बेअसर

नईदुनिया प्रतिनिधि,भोपाल। राजधानी में मेट्रो को रफ्तार देने की तैयारी और दावों के बीच जमीन पर तस्वीर उलट है। जहां निर्माण आगे बढ़ाने के लिए हर दिन महत्वपूर्ण है, वहीं मेट्रो के रास्ते में खड़ी बड़ी बाधाएं अब भी दूर नहीं हो पाई हैं।

एम्स-करोंद कॉरिडोर में आरा मशीनों की शिफ्टिंग का मामला अटका है तो अंडरग्राउंड कारिडोर का बड़ा बाग एग्जिट प्वाइंट जमीन और कब्रिस्तान विवाद में उलझ गया है।

प्रशासनिक स्तर पर बैठकों और निरीक्षणों का दौर जारी है, लेकिन मौके पर जमीन खाली कराने और विवाद खत्म करने की कार्रवाई अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाई है। सवाल अब यह है कि जब मेट्रो की साइट ही पूरी तरह साफ नहीं होगी तो परियोजना 2028 तक कैसे रफ्तार पकड़ेगी?


40 आरा मशीनों की शिफ्टिंग अभी भी चुनौती

एम्स से करोंद तक 14.99 किलोमीटर लंबे मेट्रो रूट में एम्स से सुभाष नगर तक 6.22 किलोमीटर हिस्से पर कमर्शियल रन शुरू हो चुका है। सुभाष नगर से करोंद तक 8.77 किलोमीटर हिस्से में निर्माण जारी है। इसी हिस्से में आने वाली आरा मशीनों की शिफ्टिंग बड़ा अड़ंगा है।

शहर में कुल 108 आरा मशीनें हैं। पहले चरण में 40 मशीनों को छोटा रातीबड़ में शिफ्ट किया जाना है। इसके लिए वहां सड़क और प्लाट विकसित किए गए हैं। मेट्रो प्रशासन 5.50 करोड़ रुपये भी दे चुका है, लेकिन शिफ्टिंग की प्रक्रिया अभी तक निर्णायक गति नहीं पकड़ सकी है।

बड़ा बाग में जमीन से लेकर कब्रिस्तान तक विवाद

अंडरग्राउंड कारिडोर में बड़ा बाग क्षेत्र दूसरी बड़ी चुनौती बन गया है। डीपीआर के मुताबिक नादरा स्टेशन के बाद ट्रेन को बड़ा बाग के पास भूमिगत ट्रैक से बाहर लाने के लिए एग्जिट प्वाइंट प्रस्तावित है। लेकिन संबंधित जमीन अब तक मेट्रो को उपलब्ध नहीं हो सकी है।

मुस्लिम पक्ष इसे शाही कब्रिस्तान बताते हुए 24 से 30 मीटर गहराई तक खोदाई का विरोध कर रहा है। कब्रों को नुकसान की आशंका जताए जाने के बाद प्रशासन ने जियोलाजिकल सर्वे शुरू कराया है।

यह भी पढ़ें- भोपाल में बर्थडे से प्री-वेडिंग तक के लिए मेट्रो कोच कर सकेंगे बुक, इतना देना होगा किराया; स्टेशनों के नाम भी होंगे चेंज

एक नजर में मेट्रो प्रोजेक्ट

14.99 किमी : एम्स-करोंद मेट्रो रूट

6.22 किमी : एम्स-सुभाष नगर, कमर्शियल रन शुरू

8.77 किमी : सुभाष नगर-करोंद, निर्माण जारी

108 : शहर में कुल आरा मशीनें

40 : पहले चरण में शिफ्ट की जानी हैं

5.50 करोड़ रुपये : शिफ्टिंग के लिए मेट्रो प्रशासन की राशि

22 लाख रुपये प्रतिदिन : अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट पर खर्च

2028 : परियोजना पूरी करने की प्रस्तावित समयसीमा

मेट्रो के लिए जमीन खाली करवाने की कार्रवाई निरंतर जारी है, आरा मशीनें भी जल्द शिफ्ट होंगी।वहीं बड़ा बाग मामला सुलझाने के लिए राजस्व टीमें निरीक्षण कर रही हैं, जिसका जल्द से जल्द हल निकाल लिया जाएगा। - प्रियंक मिश्रा, कलेक्टर