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भोपाल में मेट्रो रूट पर टीडीआर लागू करने का विरोध, लोग बोले- पहले नक्शा दिखाओ

भोपाल मेट्रो रेल कोरिडोर के दोनों किनारों पर लगभग आधा किलोमीटर क्षेत्र को ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) प्राप्ति क्षेत्र घोषित करने की सरकारी ...और पढ़ें

By PANKAJ SHRIVASTAVAEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sat, 12 Sep 2026 12:45:10 PM (IST)Updated Date: Sat, 12 Sep 2026 12:45:10 PM (IST)
भोपाल में मेट्रो रूट पर टीडीआर लागू करने का विरोध, लोग बोले- पहले नक्शा दिखाओ
भोपाल में मेट्रो कॉरिडोर पर विवाद खड़ा हो गया है (फाइल फोटो)

HighLights

  1. भोपाल में मेट्रो कॉरिडोर पर विवाद खड़ा हो गया है
  2. टीएंडसीपी की प्रक्रिया पर रहवासियों ने उठाए सवाल
  3. टीडीआर जोन घोषित करने के प्रस्ताव का विरोध शुरू

नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल मेट्रो रेल कोरिडोर के दोनों किनारों पर लगभग आधा किलोमीटर क्षेत्र को ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) प्राप्ति क्षेत्र घोषित करने की सरकारी कवायद पर विवाद खड़ा हो गया है। संचालनालय नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) द्वारा आमंत्रित दावे-आपत्तियों के बीच संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने शुक्रवार को इस प्रस्ताव की वैधानिकता, पारदर्शिता और औचित्य पर विरोध दर्ज कराया।

समिति के प्रतिनिधि विवेक त्रिपाठी और लवनीश भाटी ने विभाग को औपचारिक आपत्ति सौंपते हुए कहा कि विभागीय दफ्तर अथवा वेबसाइट पर टीडीआर क्षेत्र का विस्तृत नक्शा, प्रभावित खसरा नंबर और निर्माण मापदंड सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। ऐसे में आम नागरिक किस आधार पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएं।


समिति ने सवाल किया कि जब शासन भोपाल विकास योजना-2047 तैयार करने की घोषणा कर चुका है, तब दो दशक पुराने मास्टर प्लान-2005 में इतना बड़ा फेरबदल करने का क्या औचित्य है। मेट्रो कारिडोर के दायरे में श्यामला हिल्स, अरेरा कालोनी ई-1 से ई-5, बड़े तालाब का कैचमेंट, संरक्षित वन व राजभवन जैसे संवेदनशील क्षेत्र आते हैं। टीडीआर लागू होने से निर्माण घनत्व बढ़ेगा, जिससे शहर के बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और यातायात पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा।

समिति ने मांग की है कि संबंधित क्षेत्र का स्पष्ट सीमांकन और पर्यावरण प्रभाव अध्ययन रिपोर्ट पहले सार्वजनिक की जाए। साथ ही नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम की धारा 23 के तहत राजपत्र में अनिवार्य प्रकाशन की प्रक्रिया जांची जाए। समिति ने 2005 के प्लान में इस संशोधन को तुरंत निरस्त कर इसे आगामी मास्टर प्लान-2047 में सार्वजनिक परामर्श के बाद ही शामिल करने की मांग रखी है।