
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। भोपाल में करीब 15 दिन पहले पहुंची नई आरेंज वंदे भारत एक्सप्रेस वापस वाराणसी बेस शेड पहुंच गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि रेलवे रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (आरकेएमपी) के पास नई पिट लाइन का काम समय पर पूरा नहीं कर पाया। सुरक्षा मानकों के चलते बिना पिट लाइन के वंदे भारत का संचालन नहीं किया जा सकता, इसलिए बीते दो हफ्ते से राजधानी के मिसरोद स्टेशन पर खड़ी वंदे भारत को वाराणसी लौटा दिया गया और राजधानी के यात्रियों को इस नई ट्रेन का अनुभव नहीं मिल सका।
दरअसल, पिट लाइन का काम मई 2023 में शुरू हुआ था, जिसे छह माह में तैयार हो जाना था लेकिन ट्रैक और अन्य रेलवे संरचनाएं जैसे व्यवधानों से इसका काम पिछड़ता चला गया। इस अवधि में इसकी लागत भी सात करोड़ रुपये बढ़कर 14 करोड़ हो गई। आखिर में इसकी डेडलाइन नवंबर 2025 तय की गई, लेकिन रेलवे इसे भी पूरा नहीं कर पाया। अब नए साल की शुरुआत के साथ एक बार फिर इसके लिए मार्च समयसीमा तय की गई है।
देखना यह है कि यह काम तब तक पूरा हो पाता है या नहीं। नहीं तो, ऐसे में भोपाल के यात्रियों को अब फिर से 20 कोच की वंदे भारत का इंतजार करना पड़ेगा। बता दें कि यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राजधानी से नई आरेंज वंदे भारत एक्सप्रेस को शुरू करने की तैयारी की गई थी। इसी वजह से ट्रेन को करीब 15 दिन तक मिसरोद स्टेशन पर खड़ा रखा गया, लेकिन रेलवे की तीसरी पिट लाइन समय पर तैयार नहीं हो पाई, जिससे ट्रेन का जरूरी मेंटेनेंस संभव नहीं हो सकता था।
20 कोच की वंदे भारत एक्सप्रेस न चलने से यात्रियों को तेज रफ्तार, आधुनिक सुविधाओं और कम समय में यात्रा का लाभ फिलहाल नहीं मिल सकेगा। बढ़ती यात्री संख्या के कारण अन्य ट्रेनों में भीड़ बढ़ेगी, सीट मिलना मुश्किल होगा।
पिट लाइन रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का वह अहम हिस्सा है, जहां ट्रेन के नीचे से ब्रेक सिस्टम, अंडरफ्रेम, इलेक्ट्रिकल उपकरण, टायलेट सिस्टम और सेफ्टी कंपोनेंट्स की जांच की जाती है। वंदे भारत ट्रेन पूरी तरह इलेक्ट्रिक और हाई-टेक सिस्टम पर आधारित है, जिसके लिए नियमित और गहन तकनीकी जांच जरूरी होती है। पिट लाइन के बिना न तो दैनिक मेंटेनेंस संभव है और न ही रेलवे सेफ्टी सर्टिफिकेशन मिल सकता है।
ग्रीन फील्ड में निर्माण कार्य अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन जहां पहले से ट्रैक और अन्य रेलवे संरचनाएं मौजूद हों, वहां काम करना काफी जटिल होता है। यही वजह है कि इस पिट लाइन के निर्माण में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। हालांकि रेलवे इसे प्राथमिकता पर पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है और मार्च तक इसके पूरा होने की संभावना है। - अभिराम खरे, अपर मंडल, रेल प्रबंधक