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MP के सरकारी अस्पतालों में संकट... भोपाल में प्रदर्शन, 23-24 फरवरी को कर्मचारियों का 'हल्ला बोल'

मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जा रहा है। यदि समय रहते मांगों का निराकरण नहीं ह...और पढ़ें

By mukesh vishwakarmaEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Mon, 09 Feb 2026 08:11:34 PM (IST)Updated Date: Mon, 09 Feb 2026 08:12:36 PM (IST)
MP के सरकारी अस्पतालों में संकट... भोपाल में प्रदर्शन, 23-24 फरवरी को कर्मचारियों का 'हल्ला बोल'
MP में 23-24 फरवरी को कर्मचारियों का 'हल्ला बोल', AI Generated Image

HighLights

  1. 23 और 24 फरवरी को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे हजारों स्वास्थ्य कर्मचारी
  2. ₹21,000 न्यूनतम वेतन और रिक्त पदों पर विभाग में समायोजन की मांग
  3. ओपीडी, लैब टेस्टिंग और वार्डों की व्यवस्था ठप होने से मरीजों की बढ़ेगी मुश्किल

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था संभालने वाले आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जा रहा है। यदि समय रहते मांगों का निराकरण नहीं हुआ, तो आगामी 23 और 24 फरवरी 2026 को प्रदेशभर के हजारों आउटसोर्स कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे, जिससे अस्पतालों की सेवाएं चरमरा सकती हैं।

ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की रूपरेखा तय, काली पट्टी बांधकर जताएंगे विरोध

जिला अध्यक्ष चित्रवीर पटेल के नेतृत्व में कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा से मुलाकात की। उन्होंने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आंदोलन की रूपरेखा स्पष्ट की। तृतीय चरण (16-18 फरवरी) में प्रदेश के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत आउटसोर्स कर्मी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे। अंतिम चरण (23-24 फरवरी) में कर्मचारी काम बंद कर सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और भोपाल की सड़कों पर उतरकर "हल्ला बोल" प्रदर्शन करेंगे।


नौ सूत्रीय मांगों पर अड़े कर्मचारी, वेतन बढ़ाने की मांग

आउटसोर्स कर्मचारियों ने सरकार के सामने नौ सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें मुख्य रूप से विभाग में समायोजन की मांग शामिल है। एनएचएम के अंतर्गत सेवाएं दे चुके कर्मियों को रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए या संविदा में मर्ज किया जाए। आउटसोर्स कर्मियों का न्यूनतम वेतन 21,000 रुपये निर्धारित हो और अप्रैल 2024 से रुकी हुई 11 माह के एरियर राशि का तत्काल भुगतान किया जाए। रेगुलर कर्मचारियों की तरह छुट्टियां, स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए। नियमित भर्तियों में आउटसोर्स कर्मियों को 50 प्रतिशत आरक्षण मिले। निजी आउटसोर्स एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर विभाग सीधे कर्मचारियों के खातों में भुगतान करे।

स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने की आशंका: मरीजों की बढ़ेगी परेशानी

हॉस्पिटल मैनेजमेंट के लिए बड़ी चुनौती राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के जिला अस्पतालों, पीएचसी और सीएचसी में वार्ड बॉय, कंप्यूटर ऑपरेटर, सफाई कर्मी और अन्य तकनीकी पदों पर बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी तैनात हैं। इनके दो दिवसीय अवकाश पर जाने से ओपीडी रजिस्ट्रेशन, लैब टेस्टिंग और वार्डों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप होने की आशंका है। इनका कहना है कि हम लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर गुहार लगा रहे हैं, लेकिन केवल आश्वासन मिल रहा है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर हमारे लिए भी ठोस नीति बनाई जाए, अन्यथा हमें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। - चित्रवीर पटेल, जिला अध्यक्ष, म.प्र. संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ।

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