
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। प्रदेश में गत वर्ष 51.54 लाख टन धान का उपार्जन समर्थन मूल्य पर किया, लेकिन इसकी मिलिंग अब तक नहीं हो पाई है। 27 लाख टन धान गोदामों में रखा है। उधर, एक दिसंबर से फिर धान के उपार्जन की तैयारी है। इसके लिए 8,68,214 किसानों ने पंजीयन कराया है।
खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उपार्जन से पहले मिलिंग को लेकर नीति बनाएंगे ताकि समयसीमा में काम पूरा हो सके।
धान की मिलिंग करने वाले मिलर्स को एक क्विंटल धान से 67 किलोग्राम चावल बनाकर देना होता है। इसके लिए प्रति क्विंटल मिलिंग चार्ज के साथ 50 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है, मगर मिलर्स अपग्रेडेशन राशि की मांग कर रहे हैं। 2024 तक सरकार ने अपनी ओर से यह राशि दी और फिर बंद कर दिया।
मिलर्स का कहना है कि एक क्विंटल धान में 55 किलोग्राम से अधिक चावल नहीं निकलता है। बाकी मात्रा की पूर्ति के लिए बाजार से चावल लेना होता है, जिसके कारण अतिरिक्त राशि व्यय करनी होती है। इसका भुगतान सरकार करे मगर सरकार तैयार नहीं हुई तो मिलर्स ने मिलिंग करने में आनाकानी की।
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इसका परिणाम यह हुआ कि जो मिलिंग सितंबर में पूरी हो जानी चाहिए थी वह अब तक नहीं हो पाई है। 27 लाख टन धान अभी भी गोदाम में है। उधर, फिर उपार्जन प्रारंभ होने वाला है। इसे देखते हुए विभाग मिलिंग को लेकर नीति बनाने जा रहा है। अपर मुख्य सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति केसी गुप्ता का कहना है कि इस विषय को लेकर विचार चल रहा है। जल्द ही ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिससे मिलिंग समयसीमा में हो जाए।